बदायूं
उझानी में शिक्षक सम्मान का अनोखा अंदाज : “एस्सेल टीचर्स डे कार्निवल 2026” हर्षोल्लास से संपन्न, मानसी मिश्रा बनीं चैंपियन।
उझानी, बदायूं, 5 सितंबर।
शिक्षक दिवस के अवसर पर एस्सेल पब्लिक स्कूल में शिक्षक सम्मान को नया आयाम देते हुए चार दिवसीय “एस्सेल टीचर्स डे कार्निवल 2026” का भव्य आयोजन किया गया। त्रैमासिक परीक्षाओं की व्यस्तता के बीच शिक्षकों के चेहरे पर मुस्कान लाने के उद्देश्य से इस कार्निवल की शुरुआत 1 सितंबर से प्रतिदिन रात्रि 8 बजे ऑनलाइन गतिविधियों के रूप में की गई, जिसका समापन शिक्षक दिवस पर विद्यार्थियों द्वारा आयोजित रंगारंग कार्यक्रम के साथ हुआ।
कार्निवल के दौरान आयोजित ऑनलाइन प्रतियोगिताओं ने शिक्षकों को कुछ पलों के लिए फिर से विद्यार्थी बना दिया। फोटो कोलाज चैलेंज, स्ट्रीट फूड पहचानो, चल बेटा सेल्फी ले ले और चित्र देखकर गाना पहचानो व गाओ जैसी रचनात्मक स्पर्धाओं में शिक्षकों ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया। फास्टेस्ट फिंगर फर्स्ट के रोमांच के बीच शिक्षकों ने तस्वीरें खोजीं, विभिन्न वस्तुओं के साथ सेल्फी ली और गीतों को गुनगुनाया। सभी गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर मानसी मिश्रा को कार्निवल चैंपियन घोषित किया गया। वहीं सृष्टि अग्रवाल, सृष्टि सिसौदिया, प्रियंका माथुर और कशिश मित्तल सहित अन्य शिक्षिकाओं ने विजेता व उपविजेता स्थान प्राप्त किए।
शिक्षक दिवस पर आयोजित मुख्य समारोह में विद्यार्थी स्वयं मेजबान की भूमिका में नजर आए। डिंपल, अग्रिम, रिया, राधिका, दीपांशी, गरिमा, भूमि, ऋषिका, आरव, फातिमा, कंचन, ईश्वा, सिद्धि, मानवी, अन्वी, आराध्या, कृतिका, परी, इनाया, अन्विका, अंश, आयुषी, आशी, मिष्ठी, गार्गी, अवंतिका, आदित्य, तेजल, वर्तिका, कुनूत, मदीहा, एक्सा, तृषा, अक्षिता, रूही और दिव्यांशी सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से गुरुजनों के प्रति सम्मान व्यक्त किया।
कार्यक्रम का सफल संचालन पूजा यादव, प्रियंका साहू और रितिका शर्मा ने किया। व्यवस्थाओं व समन्वय में अक्षय सक्सेना का विशेष सहयोग रहा, जबकि लवी ने फोटो व वीडियो के माध्यम से यादगार क्षणों को कैद किया। प्रधानाचार्य विमल सिंह ने सभी विद्यार्थियों, शिक्षकों व सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर विद्यालय के निदेशक सुधांशु गुप्ता ने कहा, “शिक्षा केवल एक पेशा नहीं, बल्कि राष्ट्रधर्म है। शिक्षक कक्षा में केवल विषय नहीं पढ़ाता, वह आने वाली पीढ़ी की सोच, संस्कार और चरित्र का निर्माण करता है। उसके प्रयासों की छाप समाज और राष्ट्र के भविष्य पर पड़ती है।” उन्होंने कहा कि जो शिक्षक वर्षभर बच्चों के सपनों को आकार देते हैं, उनके सम्मान और खुशी के लिए विशेष पल समर्पित करना समाज और संस्थाओं का दायित्व है।
कार्निवल ने यह संदेश दिया कि शिक्षक का सम्मान केवल पुष्प, उपहार या औपचारिक शुभकामनाओं तक सीमित न रहे, बल्कि उसके परिश्रम को पहचानना और उसे आनंद के अवसर देना ही शिक्षक दिवस की सार्थकता है।



राजेश वार्ष्णेय एमके
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