1:05 pm Wednesday , 2 September 2026
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उझानी में रेलवे का ‘कालिख वाला ब्रह्मास्त्र’ : बूम पर लगा काला ग्रीस, अब झुककर निकले तो शर्ट पर लगेगी ‘कालिख की मोहर’

उझानी में रेलवे का ‘कालिख वाला ब्रह्मास्त्र’ : बूम पर लगा काला ग्रीस, अब झुककर निकले तो शर्ट पर लगेगी ‘कालिख की मोहर’।

अढौली फाटक पर ई-रिक्शा ने तोड़ा था बूम, 3 घंटे तक थमा रहा कादरचौक मार्ग – अब रेलवे ने निकाला हादसों का तोड़।

उझानी बदायूं 2 सितंबर ।

कहते हैं लातों के भूत बातों से नहीं मानते… और उझानी के जल्दबाज तो बिल्कुल भी नहीं। ट्रेन आने पर बंद फाटक के नीचे से सिर झुकाकर निकलने की होड़, बाइक को आड़ी-तिरछी कर निकाल लेना जैसे जिंदगी से बड़ी कोई जल्दी हो। लेकिन अब रेलवे ने इन सड़क के बाजीगरों के लिए ऐसा ‘काला जाल’ बिछाया है कि निकलते ही पहचान हो जाएगी।

बीते दिनों अढौली रेलवे फाटक पर हुआ था बवाल। एक बेकाबू ई-रिक्शा ने रेलवे के बंद बूम को ऐसी टक्कर मारी कि बूम बीच से दो-फाड़ हो गया। नतीजा – उझानी-कादरचौक का लाइफलाइन मार्ग पूरे तीन घंटे तक जाम। दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतारें, एंबुलेंस फंसी, एक प्रसूता ने बेटी को जाम में फंसी एंबुलेंस में जन्म दिया। लोग परेशान। रेलवे को लाखों का नुकसान सो अलग।

इसी घटना के बाद जागे रेलवे ने देसी जुगाड़ से ऐसा इलाज निकाला है कि हर कोई दंग है। विभाग ने फाटक के पूरे बूम पर गाढ़ा काला ग्रीस, मोबिल ऑयल पोत दिया है। दूर से चमकता बूम अब काला-सना दिखता है।

खेल सीधा है – फाटक बंद होते ही जो भी शख्स हीरो बनकर बूम के नीचे से घुसने की कोशिश करेगा, उसकी सफेद शर्ट, महंगी टी-शर्ट पर काले तेल की ऐसी पक्की मोहर लगेगी कि धोने से भी नहीं छूटेगी। हाथ-कपड़े काले, और लोग देखकर ही समझ जाएंगे – ये बंदा फाटक चोर है।

कई सफेदपोश तो शर्ट पर दाग देखकर गेटमैन से भिड़ जाते हैं, झल्ला जाते हैं। पर गेटमैन भी टस से मस नहीं।

गेटमैन का दो-टूक जवाब – साहब, ये ऊपर से आदेश है। शर्ट खराब होगी तो अगली बार जान बचेगी। शर्ट बाजार में मिल जाएगी, जिंदगी नहीं। अब रोज बूम पर ग्रीस लगेगा। जिसका एक बार कुर्ता काला होगा, वो जिंदगी भर फाटक खुलने का इंतजार करेगा।

रेलवे के इस ‘काले टीके’ ने दो निशाने साध दिए हैं। एक तो ट्रैक पर होने वाले दर्दनाक हादसों पर ब्रेक लगेगा, और दूसरा बार-बार टूटने वाले बूम की सुरक्षा भी पक्की हो गई है। उझानी में इस समय इस काले जुगाड़ की ही चर्चा फुल ऑन है। लोग कह रहे हैं – वाह रेलवे, क्या आइडिया लगाया है!

राजेश वार्ष्णेय एमके

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