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उझानी में शिकायत के बाद जागा स्वास्थ्य विभाग, सिर्फ नोटिस देकर लौटी टीम; बगल के अस्पतालों पर साधी चुप्पी

उझानी में शिकायत के बाद जागा स्वास्थ्य विभाग, सिर्फ नोटिस देकर लौटी टीम; बगल के अस्पतालों पर साधी चुप्पी।

बाईपास पर बिना रजिस्ट्रेशन के कई अस्पताल चल रहे, विभाग को खबर नहीं ?

उझानी-बदांयू 21 अगस्त।

उझानी के बाईपास स्थित सत्यम नर्सिंग होम की लिखित शिकायत के बाद आखिरकार शुक्रवार को स्वास्थ्य विभाग की नींद टूटी। सीएचसी अधीक्षक डॉ. देवेन्द्र कुमार मौर्य के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की टीम जांच के नाम पर अस्पताल पर जा धमकी।

टीम ने अस्पताल संचालक डॉ. राजकमल से रजिस्ट्रेशन के दस्तावेज मांगे। सूत्रों के अनुसार संचालक कोई वैध दस्तावेज नहीं दिखा पाया। वजह साफ है, जब रजिस्ट्रेशन ही नहीं है तो दिखाएगा क्या? इसके बाद टीम ने खानापूर्ति करते हुए तीन दिन में रजिस्ट्रेशन के कागजात दिखाने का नोटिस थमाया और बैरंग वापस लौट गई।

विभाग की इस कार्रवाई पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब सीएचसी की टीम आज सुबह धड़ल्ले से बिना रजिस्ट्रेशन के चल रहे अस्पतालों की जांच करने पहुंची, तो उसकी नजर सिर्फ सत्यम हॉस्पिटल पर ही पड़ी। ठीक बराबर में संचालित हो रहे दो अन्य अस्पतालों की ओर टीम ने झांकना भी मुनासिब नहीं समझा।

इस बारे में पूछे जाने पर चिकित्सा अधीक्षक का जवाब और भी चौंकाने वाला था। उन्होंने कहा – जल्दी में हैं, किसी और दिन देखेंगे।

स्वास्थ्य विभाग में नोटिस देकर मामले को मैनेज करने का यह खेल बहुत पुराना हो चुका है। जनता सब जानती है। तीन दिन के नोटिस के बाद क्या होता है, यह किसी से छिपा नहीं है। आगे सब मैनेज हो जाता है।

सवाल यह है कि वर्षों से नगर में एक दर्जन से अधिक अस्पताल और डायग्नोस्टिक सेंटर धड़ल्ले से बिना मानकों के चल रहे हैं, कौन मान सकता है कि इसकी जानकारी स्वास्थ्य विभाग को नहीं है ? सत्यम हॉस्पिटल की लिखित शिकायत आई तो मजबूरी में कार्रवाई करनी पड़ी, वरना एसी में बैठे एमओआईसी हों या सीएमओ, किसी को जमीन पर उतरकर देखने की फुर्सत ही नहीं है। जनता इन अवैध नर्सिंग होम में अपनी जान गंवाती रहे, स्वास्थ्य विभाग पर कोई फर्क नहीं पड़ता।

राजेश वार्ष्णेय एमके।

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