गाड़ियों के टैंक से रसोई तक पहुंची महंगाई-
एथेनॉल के चक्कर में चीनी ने तोड़ा 60 का रिकॉर्ड, गृहणियां परेशान।
उझानी-बदांयू 20 अगस्त।
पेट्रोल-डीजल में एथेनॉल मिलाने की नीति अब सीधे रसोई का बजट बिगाड़ रही है। चीनी के दाम पहली बार 60 रुपये किलो के पार पहुंच गए हैं। गन्ने का बड़ा हिस्सा चीनी की बजाय एथेनॉल बनाने में इस्तेमाल हो रहा है, जिसका असर अब उझानी की परचून की दुकानों से लेकर घर-घर की थाली तक दिखने लगा है।
रक्षाबंधन, जन्माष्टमी और आने वाले त्योहारों को देखते हुए चीनी की मांग बढ़ गई है। लेकिन सप्लाई कम होने से दाम आसमान छू रहे हैं। 15 दिन पहले तक 50-52 रुपये में बिकने वाली चीनी अब 60 से 62 रुपये किलो तक पहुंच गई है।
उझानी सब्जी मंडी के पास किराना व्यापारी राजेश गुप्ता बताते हैं, पहले कंपनियां चीनी का कोटा पूरा दे देती थीं। अब मिलें आधा माल चीनी और आधा एथेनॉल के लिए रोक रही हैं। स्टॉक कम है इसलिए रेट रोज बढ़ रहा है।
एक अन्य दुकानदार मोहम्मद शमीम ने बताया, ग्राहक 1 किलो की जगह आधा किलो मांग रहे हैं। मिठाई और त्योहार का सीजन है, ऐसे में लोगों की जेब पर सीधी मार पड़ेगी।
महंगाई से गृहणियां सबसे ज्यादा परेशान हैं। मोहल्ला साहूकारा की गीता देवी कहती हैं, दूध, चाय और बच्चों के टिफिन में चीनी तो रोज चाहिए। 60 के पार रेट सुनकर हाथ-पांव फूल गए। अब हलवाई की मिठाई तो सपने जैसी हो जाएगी।
गृहणियों का कहना है कि अभी दिवाली तक दाम और बढ़ सकते हैं।
केंद्र सरकार पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। इसके लिए गन्ने से ज्यादा एथेनॉल बनाया जा रहा है। चीनी मिलों को चीनी के बजाय एथेनॉल पर बेहतर रेट मिल रहा है, इसलिए उत्पादन घटा है। जानकारों का मानना है कि जब तक नया पेराई सत्र शुरू नहीं होता, राहत मिलने के आसार कम हैं।
*बाजार भाव*
खुली चीनी: 60-62 रुपये किलो।
पैकेट वाली चीनी: 63-65 रुपये किलो।
15 दिन पहले: 50-52 रुपये किलो थी।
अब देखना होगा कि सरकार स्टॉक और निर्यात पर कोई कदम उठाती है या आम आदमी को इसी महंगाई के साथ त्योहार मनाने पड़ेंगे।
राजेश वार्ष्णेय एमके
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