हाईवे बना खलिहान, रफ्तार पर लगा ‘मक्के का ब्रेक’ उझानी में हर साल का ‘सड़क-सुखाऊ’ संकट ।
प्रशासन की हिदायतें बेअसर, राहगीर बोले- ‘अब कार्रवाई चाहिए, आश्वासन नहीं’।
उझानी बदांयू 25 मई।
सड़कें यदि किसी क्षेत्र की जीवन-रेखा हैं, तो उझानी कोतवाली क्षेत्र के चमारी-सुकटिया मध्य मार्ग पर इन दिनों यह रेखा मक्के की फसल तले दबकर कराह रही है। किसानों द्वारा राजमार्ग को अवैध रूप से खलिहान में तब्दील कर देने से आवागमन का संकट गहरा गया है। एंबुलेंस से लेकर स्कूली बस तक, हर पहिए की गति पर मक्के के दानों ने अंकुश लगा दिया है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, उझानी क्षेत्र में धान-गेहूं के बाद मक्का प्रमुख फसल है। फसल कटने के बाद उसे सुखाने के लिए किसान सीधे मुख्य मार्ग का इस्तेमाल कर रहे हैं। हाईवे की काली सड़क पर पीले मक्के की मोटी परत बिछाकर उसे घंटों धूप दिखाई जाती है। इससे सड़क की चौड़ाई आधी रह जाती है और दोपहिया वाहन फिसलकर दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं।
क्षेत्रीय नागरिकों का आरोप है कि यह समस्या नई नहीं। “प्रशासन हर साल आता है, किसानों को औपचारिक हिदायत देकर चला जाता है। मगर किसानों के कानों पर जूँ तक नहीं रेंगती। वे अपनी आदत से मजबूर हैं,” स्थानीय कांग्रेस नेता सतवीर सिंह यादव ने जिलाधिकारी से कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि खेत खाली पड़े हैं, फिर भी सड़क को खलिहान बनाने की जिद समझ से परे है। इस वर्ष मक्के की बंपर पैदावार के चलते आशंका है कि बमनोसी-उझानी संपर्क मार्ग पर अगले कुछ दिनों में सड़क कम और मक्का ज्यादा नजर आएगा।
पिछले वर्षों में इसी कारण कई हादसे हो चुके हैं। रात के समय सड़क पर बिछे मक्के के कारण वाहन चालकों को दूरी का अंदाजा नहीं लगता और टकराव की नौबत आ जाती है। सबसे ज्यादा परेशानी रात में चलने वाली आपातकालीन सेवाओं को होती है।
स्थानीय लोगों ने प्रशासन से माँग की है कि केवल नोटिस और हिदायत से काम नहीं चलेगा। सड़क पर फसल सुखाने वालों पर सख्त कार्रवाई हो और किसानों के लिए वैकल्पिक सुखाने-स्थल चिन्हित किए जाएं।
“अगर समय रहते प्रशासन नहीं चेता, तो किसी बड़े हादसे की जिम्मेदारी किसकी होगी?” यह सवाल आज उझानी की फिज़ाओं में गूंज रहा है।
मोटर वाहन अधिनियम के तहत सार्वजनिक मार्ग को अवरुद्ध करना दंडनीय अपराध है। इस पर जुर्माने के साथ-साथ यातायात बाधित करने की धाराओं में मुकदमा भी दर्ज हो सकता है।
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राजेश वार्ष्णेय एमके।


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