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उझानी की सड़कों पर दौड़ रहे मानक के विपरीत ई-रिक्शा, लोगों की जान से खिलवाड़

उझानी-बदांयू 23 मार्च।

नगर से लेकर जिलेभर की सड़कों पर तय मानकों के विपरीत बड़े आकार के ई-रिक्शा खुलेआम दौड़ रहे हैं। सड़कों पर 4 प्लस-1 की जगह 6 प्लस-1 क्षमता के ई-रिक्शा संचालित हो रहे हैं। ई-रिक्शा निर्माता कंपनियां और चालक अपने मुनाफे के चक्कर में आम लोगों की जिंदगी दांव पर लगा रहे हैं।
परिवहन, यातायात विभाग और पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही।

बदांयू संभागीय परिवहन विभाग में लगभग हजारों ई-रिक्शा पंजीकृत हैं। विभाग में 4 प्लस-1 की क्षमता का पंजीकरण किया जाता है। वहीं, जिले में 20 से अधिक कंपनियों के ई-रिक्शा बिक्री हो रहे हैं। नियमों के अनुसार एल-थ्री श्रेणी के ई-रिक्शा की अधिकृत क्षमता सिर्फ 4+1 ही है लेकिन अधिकांश कंंपनियां बिना किसी तकनीकी प्रशिक्षण, मान्यता या डिजाइन स्वीकृति के 6 प्लस-1 क्षमता वाले ई-रिक्शा तैयार कर रही हैं। इन ई-रिक्शाें की चौड़ाई इसलिए बढ़ाई जा रही है, जिससे पीछे की सीटों पर दो के बजाय तीन यात्री बैठ सकें। क्षमता से दोगुने यात्री बैठने के कारण अक्सर ई-रिक्शा का संतुलन बिगड़ता है और सड़कों पर हादसों का ग्राफ बढ़ रहा है।

ई-रिक्शा में पीछे वाली सीट पर दो-दो व आगे वाली सीट पर सिर्फ एक व्यक्ति (चालक) को बैठने का नियम है। लेकिन अधिकांश ने नियम विरुद्ध ई-रिक्शा ले रखे हैं। जिससे वे तीनों सीटों पर तीन-तीन यात्रियों को बैठाकर सफर करवाते नजर आ रहे हैं। अत्यधिक चौड़ाई के कारण ये ई-रिक्शा आए दिन हादसों का कारण बन रहे हैं।

ई-लोडर भी मानकों के विपरीत

जिले में सवारी ढोने वाले ई-रिक्शा ही नहीं, बल्कि माल ढोने वाले ई-लोडर भी मानकों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। अधिकांश की लंबाई, चौड़ाई और औसत रफ्तार को अवैध रूप से बढ़ा दिया गया है। विभागीय अफसरों के अनुसार ई-लोडर की निर्धारित चौड़ाई 1 मीटर और लंबाई 2.8 मीटर होनी चाहिए, जबकि अधिकतम रफ्तार 25 किलोमीटर प्रति घंटा तय है। यातायात विभाग कार्रवाई करने की बात कहता तो है मगर धरातल पर कुछ नजर नहीं आता।

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