उझानी बदांयू 1 सितंबर।
नगर पालिका के गंदे व प्रदूषित पानी को लेकर हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस अरूण भंसाली व जस्टिस क्षितिज शेलेन्द्र जे की दो सदस्यीय खंडपीठ ने ग्रामीणों की जनहित याचिका पर तल्ख टिप्पणी की है कि जल्द सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाकर ग्रामीणों को राहत पहुंचाई जाऐ अगली 22 तारीख को कोर्ट के सामने जलनिगम व नगरपालिका को कार्रवाई से अवगत कराया जाऐ।ऐसा ना हो कि कोर्ट को आदेश देना पडे।

जनहित याचिका पर कोर्ट ने अपने आदेश में लिखा है यह याचिका प्रतिवादियों को नगर पालिका परिषद, उझानी,के गाँव नरऊ,अचौरा मलिकपुर, मीहलाल नगला, के ग्रामीणों ने रुके हुए और प्रदूषित नाले के पानी को भैंसौर नदी में न छोड़ने और सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का निर्माण करने और एसटीपी से नाले के पानी के निपटान के लिए उचित जल निकासी प्रणाली तैयार करने का निर्देश देने के लिए दायर की गई है।
माननीय न्यायाधीश ने आदेश में लिखा है कि अंतरिम आदेश जारी किए गए हैं, जो दर्शाते हैं कि एसटीपी स्थापित करने के लिए नगर पालिका परिषद द्वारा भूमि उपलब्ध कराई गई है, लेकिन पंपिंग स्टेशन के लिए भूमि उपलब्ध नहीं है और इस संबंध में अधिशासी अभियंता, जल निगम को एक पत्र भेजा गया है। नगर पालिका परिषद ने 07.03.2025 को भूमि की अनुपलब्धता के बारे में जवाब दिया है।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा यह आश्चर्यजनक है कि एसटीपी स्थापित करने की आवश्यकता को नकारा नहीं गया है, लेकिन 15 मीटर x 15 मीटर की भूमि की आवश्यकता के लिए एसटीपी का निर्माण रुका हुआ है और 6 महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद नगर पालिका परिषद द्वारा इस आवश्यकता को इंगित किया गया है और जवाब दिया गया है, लेकिन आगे कोई कदम नहीं उठाए गए हैं।
न्यायाधीश ने आदेश में लिखा है कि विद्वान स्थायी अधिवक्ता के साथ-साथ नगर पालिका परिषद के अधिवक्ता को निर्देश दिया गया है कि वे यह सुनिश्चित करें कि जल निगम के अधिकारी और नगर पालिका परिषद एक संयुक्त बैठक करें और एसटीपी के काम को तेजी से आगे बढ़ाने के उद्देश्य से भूमि की आवश्यकता/उपलब्धता के संबंध में निर्णय लें।
इस संबंध में अगले दो सप्ताह के भीतर एक रिपोर्ट तैयार की जानी चाहिए और अगली तिथि पर न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत की जानी चाहिए। इस मामले की अगली सुनवाई को 22.09.2025 को नए सिरे से की जाएंगी।
आखिर में मुख्य न्यायाधीश ने आदेश में लिखा है, यह स्पष्ट किया जाता है कि यदि प्रतिवादी कोई समाधान नहीं ढूंढ पाते हैं, तो इस न्यायालय को पानी के निर्वहन के संबंध में आदेश पारित करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
राजेश वार्ष्णेय एमके।





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