8:55 pm Wednesday , 19 August 2026
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आस्था-कांवड़ भरने को कोई दो सौ, तो किसी ने तीन सौ किलोमीटर का रास्ता तय किया

सावन के आखिरी सोमवार को जलाभिषेक के बाद हाइवे पर थम गया कांवड़ियों का सिलसिला।

उझानी बदांयू 4 अगस्त।

शिव की साधना की राह में हौंसलों की कावंड़ उठाकर श्रद्धालु दुर्गम पथ पर पूरे जोश के साथ बम भोले के जयकारे लगाते हुए चल रहे हैं। किसी ने 200 तो किसी ने 300 किमी की यात्रा कर देवो के देव महादेव पर गंगाजल अर्पित किया। आज सावन का आखिरी सोमवार बीतने के बाद हाइवे पर कांवड़ियों का सिलसिला एक बर्ष के लिए थम जाऐगा।

भोले की भक्ति की डगर को कांवड़िये कठिन साधना करते हुए हौंसलों से पूरा कर रहे हैं। हाइवे से श्रावण मास का अंतिम सोमवार 4 अगस्त आज है इसके चलते पिछले तीन सोमवार से अधिक श्रद्धालुओं के आज कछला गंगा घाट पर पहुंचने का अनुमान लगाया गया।

श्रावण मास में गंगा जल से भोलेनाथ के अभिषेक की मान्यता है। ऐसे में तमाम श्रद्धालु सैकड़ों किमी का सफर तय कर मोक्षदायिनी कछला के गंगाघाट पहुंचे ,आज सोमवार की सुबह तक श्रद्धाल़ुओं का आवागमन हुआ। उसके बाद पूर्णिमा तक इक्का-दुक्का कांवड़ियां ही हाइवे पर नजर आऐगा।

आज तक यूपी ,मध्यप्रदेश और राजस्थान के श्रद्धालु लगातार कछला गंगाघाट से कांवड़ भरकर ले जा रहे थे। वहीं आगरा, फिरोजाबाद,हाथरस, मथुरा , पीलीभीत, पूरनपुर, शाहजहांपुर, गोला गोकर्णनाथ,पलिया व आसपास के जनपदों के कांवड़िवे भी तीर्थनगरी कछला में गंगाजल लेने आए। गंगा मईया के पवित्र जल में गंगा स्नान कर प्रसाद अर्पित कर परिवार की खुशहाली की कामना के साथ, कांवड़ियों ने गंगा किनारे कांवड़ सजाकर उसमें पवित्र गंगाजल से भरा पात्र रखा। कांवड की पूजा अर्चना कर दंड बैठक लगाकर अपने अपने गंतव्य को रवाना होकर बम-बम भोले के जयकारों संग अपने आराध्य देवाधिदेव महादेव को गंगाजल अर्पित कर अपने सारे दुःख दर्द भुलाकर अगले साल आने को दूसरी मनौती मांगी। अब यह सिलसिला एक बर्ष के लिए थम जाऐगा।

राजेश वार्ष्णेय एमके।

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