5:25 pm Sunday , 16 August 2026
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प्रीति पूर्वक धर्म अनुसार यथायोग्य वर्तना चाहिए- आचार्य संजीव रूप

बिल्सी , तहसील क्षेत्र के यज्ञतीर्थ गुधनी स्थित प्रज्ञा यज्ञ मंदिर में आर्य समाज का साप्ताहिक सत्संग आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ ऋग्वेद के मंत्रों से विशेष आहुतियां देकर किया गया।
सबसे प्रीति पूर्वक धर्म अनुसार यथायोग्य वर्तना चाहिए:*आचार्य संजीव रूप

सुप्रसिद्ध वैदिक विद्वान आचार्य संजीव रूप ने यज्ञ संपन्न कराते हुए कहा कि आर्य समाज के दस नियम विश्व के समस्त मनुष्यों के कल्याण का मार्ग दिखाते हैं। आर्य समाज का एक महत्वपूर्ण नियम है— “सब मनुष्यों से प्रीतिपूर्वक, धर्मानुसार, यथायोग्य व्यवहार करना चाहिए।”
उन्होंने कहा कि इसका अर्थ है कि प्रत्येक मनुष्य को सभी मनुष्यों और प्राणी मात्र के प्रति प्रेमभाव रखना चाहिए, किंतु इसमें धर्मानुसार और यथायोग्य व्यवहार का विशेष ध्यान रखना आवश्यक है। यदि कोई दुष्ट व्यक्ति समाज अथवा राष्ट्र के लिए खतरा बन जाए या कोई हिंसक प्राणी दूसरों के जीवन के लिए संकट उत्पन्न करे, तो उसके प्रति केवल प्रेम दिखाना उचित नहीं है। ऐसे समय में दुष्टता और हिंसा को रोकना तथा आवश्यकतानुसार दंड देना ही धर्मसम्मत कर्तव्य है।
आचार्य संजीव रूप ने कहा कि आर्य समाज हमें यह भी शिक्षा देता है कि “अपनी ही उन्नति में संतुष्ट न रहें, किंतु सबकी उन्नति में अपनी उन्नति समझें।” यही भावना समाज और राष्ट्र को आगे ले जाने का आधार बन सकती है।
इस अवसर पर राकेश आर्य, श्रीमती लीलावती देवी, श्रीमती संतोष कुमारी, श्रीमती कमलेश कुमारी, श्रीमती सरोज देवी, विचित्रपाल सिंह, नीरेश कुमार सहित आर्य संस्कारशाला के बच्चे उपस्थित रहे।

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