उझानी- नरऊ के नाले के नर्क ने निगल लिए 100 बीघा खेत, अब हाइवे की बारी!।
उझानी में जल निगम व नगरपालिका की लापरवाही से हाहाकार।
उझानी, बदायूं 11 मई 2026।
उझानी की नगरपालिका सो रही है, बदांयू जल निगम कुछ करने की स्थिति में नजर नहीं आता इसी वज़ह से नरऊ गांव के किसान रो रहे हैं! नगरपालिका के गंदे नाले ने ऐसा तांडव मचाया कि 100 बीघा सोना उगलने वाली जमीन देखते-देखते नर्क के दलदल में बदल गई। खेतों में लहलहाती फसल की जगह अब बदबूदार पानी की चादर बिछी है।
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खेतों को डकारा, अब हाइवे पर निशाना।


पहले उझानी नगर के नाले का पानी तालाब में जाता था, हाइवे निर्माण के चलते ग्रामीणों ने पानी तालाब में जाने से रोक दिया, तो जहरीला पानी सडक किनारे के खेतों को निगल गया। किसानों की सालभर की मेहनत पर पानी फिर गया। अब इस गंदे पानी की काली नजर करोड़ों के नवनिर्मित हाइवे पर है। हाइवे किनारे डाली गई मिट्टी पानी में ऐसे समा रही है जैसे चीनी चाय में। नींव खोखली हो रही है और हाइवे कभी भी धंसक सकता है।
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किसान बोले: “बर्बाद हो गए साहब!”
गांव के किसान रामपाल की आंखें भर आईं। बोले, “गेहूं तो कट गया, पर धान का क्या होगा? खेत में 4 फीट गंदा पानी है। बच्चों को क्या खिलाएंगे? नगरपालिका को कितनी बार जगाया, नगर पालिका ने जल निगम पर ढींकरा फोड दिया, किसी विभाग के साहब के कान पर जूं तक नहीं रेंगी।”
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प्रशासन बेखबर, जनता बेबस
सबसे बड़ा सवाल: आखिर इतने समय बाद हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी गंदे पानी की निकासी का इंतजाम क्यों नहीं किया? अधिकारियों की लापरवाही से आज 100 बीघा जमीन बंजर हो गई और कल हाइवे पर बड़ा हादसा हो सकता है। ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। हाइवे पर पुलिया निर्माण भी ग्रामीणों ने नहीं होने दिया कहते हैं खेतों से पानी नहीं निकला और मुआवजा नहीं मिला, तो इसी हाइवे पर फिर से धरना देंगे। फिर न निकल पाएगी गाड़ी, न निकल पाएंगे अधिकारी।”
फिलहाल जल निगम ,नगरपालिका के अफसर चुप्पी साधे बैठे हैं। देखना है कि किसानों का दर्द उन्हें कब सुनाई देता है, या फिर हाइवे की मिट्टी धंसने का इंतजार है?।
राजेश वार्ष्णेय एमके।
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