बदायंू की बात – सुशील धींगडा के साथ
पता नहीं कुंवरगांव, वजीरगंज और बिसौली की आत्मीयता की जमीन को किसकी नजर लगी है जो जरा सी ताकत मिलने पर जमीन के कब्जे करके अपनी तिजारी भरने का रास्ता बनाना शरू कर देता है। कुछ वर्ष पहले नगर पंचायत वजीरगंज की भूमि पर अवैध कब्जे का मामला सुर्खियों में आया था जिसको लेकर मुकदमा भी दर्ज हुआ। तत्कालीन भाजपा सांसद डा संघमित्रा मौर्य ने बदायूं से प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर तक इस मामले में कार्रवाई कराने को काफी मशक्कत की लेकिन मामला में कानूनी दांवपेंच ऐसे लगे कि आज तक नगर पंचायत की भूमि दबंगों के कब्जे से मुक्त नहीं हो पाई है। कुंवरगांव की तरफ निगाह डाले तो कुंवरगांव में एक जमीन के कब्जे को लेकर सत्ता की छीछालेदर सी हो रही है। बताते हैं कि मुकदमा भी हो चुका लेकिन बरेली से सत्ताधारी सफेदपाश मामले की जडों में मठठा डालकर अपनों को बचाने में पूरी ताकत लगाने में जुटे होने की चर्चा कुवंरगांव की हर गली और हर मोहल्ले की पंचायत में चर्चा का विषय बनी हुई है। बिसौली की कहानी तो कुछ अजीब दिखाई देती है जहां कुछ प्रभावशाली लोग बाइपास नहीं बनने के ऐडी चोटी का जोर लगा रहे है क्योंकि इससे उनकी जमीन के भाव औधें मुह गिर जाएगें। बिसौली मे ंजाम से आम आदमी हलकान है लेकिन अपनी जमीन की कीमत कम की आशंका के चलते बाईपास तो दूर बिसौली में डिवाइडर बनाने की योजना का विरोध कर रहे हैं और उसकी सजा बिसौली में रहने वालों के साथ बिसौली से निकलने वाले वाहनों के चालक भुगतने को मजबूर हो रहे हैं। नागरिकों की समझ में एक बात नहीं आ रही कि बिल्सी के विधायक हरीश शाक्य अपनी लगन से बाइपास स्वीकृत कराने में सफल हो गए तो बिसौली के विधायक आशुतोष मौर्य कहां हैं जो अब तक बिसौली में बाइपास अथवा डिवाइडर कोई योजना स्वीकृत क्यों नहीं हो रही हैं।
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