बदायूं
गंगा की कटान का कहर: खेत-फसल निगल रही नदी, तटबंध पर मंडराया खतरा
केशव गुप्ता
उसहैत के भुंडी-कदमनगला में तेज हुआ भू-कटान, करीब 40 बीघा कृषि भूमि फसल समेत गंगा में समाई; ग्रामीणों में दहशत, डॉ. शैलेश पाठक ने पहुंचकर बांटी राहत सामग्री
बदायूं। गंगा नदी की तेज धार से उसहैत क्षेत्र के भुंडी और कदमनगला गांव में भू-कटान ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। लगातार कटान के चलते किसानों की उपजाऊ जमीन और खड़ी फसलें गंगा में समाती जा रही हैं। ग्रामीणों के मुताबिक तटबंध से गंगा की दूरी भी तेजी से घट रही है, जिससे आने वाले समय में तटबंध की सुरक्षा को लेकर खतरा बढ़ गया है।
ग्रामीणों के अनुसार गंगा की धारा में घुमाव के कारण भुंडी क्षेत्र में भू-कटान तेज हुआ है। तटबंध से नदी की दूरी पहले करीब 400 मीटर थी, जो अब घटकर लगभग 250 मीटर रह गई है। कटान की यही रफ्तार बनी रही तो तटबंध भी इसकी चपेट में आ सकता है।
कदमनगला क्षेत्र में भी गंगा लगातार कृषि भूमि को निगल रही है। ग्रामीणों के अनुसार करीब 40 बीघा कृषि भूमि फसल समेत नदी में समा चुकी है। कई खेतों में धान और यूकेलिप्टिस सहित अन्य फसलें खड़ी थीं, जो कटान की भेंट चढ़ गईं।
कटान से प्रभावित किसानों में लोकपाल ठाकुर की 10 बीघा, जयपाल वाल्मीकि, लालाराम और रामपाल की 12 बीघा, राम सिंह व श्याम सिंह की 18 बीघा में से करीब 5 बीघा, वीरेश, राजेश व पुष्पेंद्र की 5 बीघा तथा जयवीर और लालाराम की 2 बीघा जमीन शामिल बताई गई है। मदन की करीब 3 बीघा कृषि भूमि भी फसल सहित नदी में समा गई।
ग्रामीणों ने बताया कि कटान केवल खेतों तक सीमित नहीं है, बल्कि तटबंध और आसपास की आबादी पर भी खतरा मंडरा रहा है। लगातार जमीन खिसकने से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है। ग्रामीण प्रशासन से कटान रोकने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाने की मांग कर रहे हैं।
डॉ. शैलेश पाठक ने लिया जायजा, बांटी राहत सामग्री
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए 20 अगस्त की शाम भाजपा के वरिष्ठ नेता डॉ. शैलेश पाठक बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में पहुंचे। उनके साथ बाढ़ खंड के जेई और राजस्व विभाग की टीम भी मौजूद रही। टीम में कानूनगो भगवानदास तथा लेखपाल अमित कुमार और सत्यदेव शामिल रहे।
डॉ. पाठक ने प्रभावित ग्रामीणों से बातचीत कर उनकी समस्याएं जानीं और हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया। उन्होंने बाढ़ प्रभावित इलाके का दौरा कर निजी साधनों से राहत सामग्री भी वितरित की।
नाव के जरिए प्रभावित क्षेत्र में पहुंचे डॉ. पाठक ने ग्रामीणों को राहत सामग्री उपलब्ध कराई। उन्होंने कहा कि संकट की इस घड़ी में प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता दिलाने का प्रयास किया जाएगा।
ग्रामीण बोले—समय रहते नहीं रोका गया कटान तो बढ़ेगा संकट

ग्रामीणों का कहना है कि गंगा की कटान की रफ्तार लगातार बनी हुई है। यदि प्रशासन ने जल्द ठोस कदम नहीं उठाए तो बची हुई कृषि भूमि के साथ तटबंध और आबादी भी खतरे में आ सकती है। किसानों का कहना है कि जमीन के साथ फसल का नुकसान उनकी आजीविका पर भी सीधा असर डाल रहा है।
फिलहाल गंगा की तेज धार के सामने ग्रामीणों की चिंता बढ़ती जा रही है। किसानों की नजर अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी है कि कटान रोकने के लिए कब प्रभावी और स्थायी इंतजाम किए जाते हैं।
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