नगर के छोटे-व्यापारी बोले- कारोबार बचाने और रोजी-रोटी जुटाना चुनौती।
उझानी बदांयू 7 जुलाई।
ऑनलाइन खरीदारी और चंद मिनटों में घर तक छोटे-छोटे सामान की डिलिवरी से आम लोगों को सहूलियत तो मिली है, लेकिन छोटे-मध्यमवर्गीय व्यापारियों के सामने अस्तित्व बचाने की चुनौती खड़ी हो गई।
उनका कहना है कि 70 फीसदी तक बिक्री कम हो गई है। उनका पूरा कारोबार डगमगाने लगा है। नगर के करीब एक हजार कारोबारी इसकी जद में हैं।
कारोबारियों का कहना है कि उनके सामने बाजार में बने रहने के साथ रोजी-रोटी जुटाना भी चुनौती है।
व्यापारियों का कहना है कि ऑनलाइन माध्यम के कारण स्थानीय छोटे व्यापारियों को हर माह नुक़सान उठाना पड रहा है, लेबर का खर्च निकालना भी मुश्किल हो रहा है।
नगर के व्यापारियों का कहना है कि सरकार एक ओर वोकल फॉर लोकल को बढ़ावा दे रही है, वहीं ऑनलाइन कारोबार पर किसी प्रकार का अंकुश नहीं है। ऑनलाइन खरीदारी का चलन बढ़ने से लोकल व्यापारियों को लगातार घाटे का सामना करना पड़ रहा है। ऑनलाइन ट्रेडिंग में अधिकांश विदेशी कंपनियां शामिल हैं, जिनका मुनाफा विदेश जा रहा है। इसके अलावा स्थानीय व्यापारियों के पास काम करने वालों पर बेरोजगारी का खतरा मंडराने लगा है।
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सरकार एक उच्चस्तरीय कमेटी बनाकर ऑनलाइन बिजनेस मॉडल की जांच करते हुए छोटे व्यापारियों को राहत देने के लिए सुगम रास्ता निकाले। इसमें दोनों तरह के व्यापार पनप सके और देश की तरक्की में सहायक हों। -अभिषेक वार्ष्णेय, व्यापारी
ऑनलाइन बाजार के लिए ऐसी गाइडलाइंस तय करनी चाहिए, जिसमें स्थानीय व्यापारियों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। मौजूदा समय में 10 रुपये की पानी बोतल भी ऑनलाइन मिल रही है। – अभिनव सक्सेना, युवा व्यापारी नेता।
ऑनलाइन खरीदारी के लिए कोई कायदे-कानून नहीं है। इसकी पहुंच अब कस्बों और गांवों तक है। इससे गांवों के छोटे-छोटे दुकानदारों को भी सीधे नुकसान उठाना पड़ रहा है। -मनोज गोयल, व्यापारी।

राजेश वार्ष्णेय एमके
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