कुर्सी बदली, कमीशनखोरी जस की तस : उझानी CHC में प्रसूताओं से लूट।
ई-रिक्शा चालक की पत्नी की डिलीवरी में 2100 ऐंठे, सीएम से शिकायत ।
उझानी (बदायूं) 6 सितंबर ।
स्वास्थ्य विभाग ने अधीक्षक का चेहरा बदलकर सोचा कि उझानी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सुधर जाएगा, लेकिन हकीकत ये है कि कुर्सी बदली है, कमीशनखोरी और वसूली का धंधा जस का तस है। जिले की टॉप कही जाने वाली CHC आज इलाज केंद्र नहीं, दलाली और रेफरल का अड्डा बन चुकी है।
सरकारी अस्पताल में प्रसव पूरी तरह निशुल्क है, लेकिन उझानी CHC में बिना पैसे दिए प्रसव होना नामुमकिन सा हो गया है। ताजा मामला 4 तारीख की रात का है। मोहल्ला बालाजीपुरम निवासी ई-रिक्शा चालक राजबाबू अपनी पत्नी संजो देवी को प्रसव पीड़ा में लेकर CHC पहुंचा। आरोप है कि उसकी पत्नी ने बेटी को जन्म एंबुलेंस में ही दिया था, फिर भी दवा के नाम पर ड्यूटी पर तैनात स्टाफ नर्स ने 2100 रुपये वसूल लिए। गरीब ई-रिक्शा चालक ने इसकी लिखित शिकायत मुख्यमंत्री सहित स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारियों को भेजी है।
सूत्र बताते हैं कि ये तो सिर्फ एक मामला है। रात में आने वाले अधिकांश डिलीवरी केसों को जानबूझकर यह कहकर प्राइवेट अस्पतालों में रेफर कर दिया जाता है कि यहां डॉक्टर नहीं है, व्यवस्था नहीं है। आरोप है कि हर रेफर केस पर प्राइवेट अस्पतालों से मोटा कमीशन बंधा हुआ है।
CHC का हाल देखिए – दवा है नहीं, विशेषज्ञ डॉक्टर नदारद हैं। पूरा अस्पताल राजकीय मेडिकल कॉलेज बदायूं के प्रशिक्षु डॉक्टरों के भरोसे चल रहा है। इमरजेंसी जैसी संवेदनशील जगह पर भी अनुभवी डॉक्टर की जगह इंटर्न मरीजों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं।
सरकार ने लाखों की जांच मशीनें तो भेज दीं, लेकिन रिपोर्ट देखने वाला कोई विशेषज्ञ ही तैनात नहीं किया। मशीनें धूल फांक रही हैं और मरीजों को मजबूरन बाहर महंगी जांच करानी पड़ रही है।
कुल मिलाकर उझानी CHC अब सरकारी अस्पताल कम, प्राइवेट अस्पतालों का रेफरल सेंटर ज्यादा बन गया है। बड़ा सवाल यही है कि गरीबों की इस लूट पर स्वास्थ्य महकमा कब जागेगा ?।
राजेश वार्ष्णेय एमके।
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