1:37 pm Sunday , 6 September 2026
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सकारात्मक सोच ही हमें प्रसन्न रखती है – प्रश्रय आर्य

साप्ताहिक सत्संग

सकारात्मक सोच ही हमें प्रसन्न रखती है – प्रश्रय आर्य

बिल्सी। तहसील क्षेत्र के यज्ञ तीर्थ गुधनी स्थित प्रज्ञा यज्ञ मंदिर में आर्य समाज का साप्ताहिक सत्संग आयोजित किया गया।
इस अवसर पर पं. प्रश्रय आर्य ने यज्ञ संपन्न कराते हुए कहा, “सकारात्मक सोच ही हमें प्रसन्न रखती है। गर्मी में यदि गर्मी न होगी तो फिर गर्मी कैसी? वर्षा ऋतु में यदि वर्षा न होगी तो फिर वर्षा ऋतु कैसी? इसी प्रकार शीत ऋतु में ठंड न हो तो उस ऋतु का महत्व ही क्या रह जाएगा?”
उन्होंने कहा कि प्रत्येक परिस्थिति को सहजता से स्वीकार करते हुए व्यक्ति को प्रसन्न रहना चाहिए। गर्मी में “बहुत गर्मी है”, वर्षा में “मौसम बहुत खराब है” और सर्दी में “बहुत ठंड है”—इस प्रकार हर परिस्थिति में शिकायत करना नकारात्मक सोच का परिचायक है। हमें परिस्थितियों में बुराई के साथ-साथ अच्छाई को भी देखने का प्रयास करना चाहिए, क्योंकि संसार में ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है जिसमें कोई बुराई न हो और ऐसा भी कोई नहीं है जिसमें कोई अच्छाई न हो।
उन्होंने कहा कि सकारात्मक दृष्टिकोण रखने वाला व्यक्ति विपरीत परिस्थितियों में भी प्रसन्न रह सकता है और जीवन को बेहतर बना सकता है।
इस अवसर पर राकेश आर्य, विचित्रपाल सिंह, गोपाल आर्य, सुराजावती देवी, कमलेश कुमारी, सरोज देवी सहित आर्य संस्कार शाला के बच्चे उपस्थित रहे।

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