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किल्लत .. देहात क्षेत्रों में लोटने लगा पुराना दौर उपले-लकड़ी से सुलगने लगे चूल्हे, बनने लगीं रोटियां

देहात की महिलाएं बोलीं- गैस नहीं तो क्या रोटी नहीं खाएंगे।

उझानी-बदांयू 13 मार्च।

रसोई गैस का संकट शहर के साथ गांवों में भी गहरा रहा है। महिलाएं गैस की किल्लत को चुनौती देते हुए पुराने ढर्रे पर लौट आई हैं। घर-आंगनों में चूल्हे सुलगने लगे हैं, चूल्हों की लिपाई करने के बाद रोटी बनाई जा रही है। हालांकि कुछ नवविवाहिताओं को चूल्हे पर परेशानी का भी सामना करना पड़ रहा है।

रसोई गैस सिलेंडर की कमी को भांपते हुए ग्रामीण महिलाओं ने इस गैस संकट से निकलने की पहल शुरू कर दी है, महिलाओं का कहना है कि पहले की अपेक्षा चूल्हे पर खाना बनाना कम हो गया है। घर के सभी लोग गैस पर खाना पकाने के साथ अन्य कार्य करने के आदी हो गए हैं लेकिन जब गैस की कमी है तो उन्होंने चूल्हों पर कार्य करना शुरू कर दिया।

वहीं नवविवाहिताएं जो चूल्हे पर खाना पकाना नहीं जानती, उनके लिए यह समय काफी चुनौती भरा है। पर गैस की मारामारी को देखते हुए ऐसी महिलाओं ने भी अपने घरों में उपले और लकड़ी से चूल्हा सुलगाकर खाना पकाना शुरू कर दिया है।

गांवों में अभी बहुत से घरों में जहां पशु है अपने घर के बनाए उपले (कंडे )का इस्तेमाल कर रहे हैं लेकिन कुछ लोग घरों और बाजार से लकड़ी और उपले खरीद रहे हैं। कस्बे के हलवाई राकेश ने बताया कि बाजार में एक सो उपले( कंडे ) 150 रुपये में मिल रहे हैं, वहीं जलाऊ लकड़ी आठ रुपये प्रति किलो मिल रही है। देहात क्षेत्र के कुछ लोग पेड़ों की सूखी लकड़ी को भी काट रहे हैं।

गैस की कमी जैसी परेशानी हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकती। गैस की किल्लत होने पर वह देश और परिवार दोनों का फर्ज निभा कर लकड़ी व गोबर के उपलों के माध्यम से गुजारा कर रही हैं। बसंती देवी, गांव नरऊ उझानी।

पुत्रवधू चूल्हे पर खाना पकाना नहीं जानती तो क्या हुआ कुछ दिनों के लिए गैस नहीं मिलेगी तो वह स्वयं पुराने तरीके से घर में चूल्हा सुलगा कर लकड़ी ईंधन से खाना पकाकर अपने परिजनों का काम चलाएंगी। धीरे-धीरे बहू को भी चूल्हे पर खाना बनाना सिखा देंगी।
मंजू रानी, गांव नरऊ उझानी।

15 दिन से उनके घर में गैस नहीं है। पत्नी कहती है कि वह चूल्हे पर खाना नहीं बनाएगी। इधर बार-बार कॉल करने के बाद भी गैस की बुकिंग नहीं हो पा रही है, लगता है कि गैस की यह किल्लत कहीं उसके लिए मुसीबत ना बन जाए। सोहनलाल, उझानी।————–

राजेश वार्ष्णेय एमके

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