नूरपुर पिनौनी (इस्लामनगर): विकास और स्वच्छता के बड़े-बड़े दावों के बीच नूरपुर पिनौनी की जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। यहाँ का नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, जो ग्रामीणों के लिए जीवन रक्षक होना चाहिए था, खुद जलभराव के टापू में तब्दील हो गया है।
बीमारों की राह में गंदा पानी, जिम्मेदार मौन
अस्पताल के मुख्य द्वार पर महीनों से सड़ रहा गंदा पानी अब केवल बदबू ही नहीं, बल्कि संक्रामक बीमारियों को भी न्योता दे रहा है। सबसे बदतर स्थिति गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों की है, जिन्हें घुटने भर गंदे पानी से होकर इलाज के लिए जाना पड़ रहा है। निकासी के नाम पर प्रशासन के पास सिर्फ ‘आश्वासन’ की पोटली है, जो हर शिकायत के बाद ग्रामीणों को थमा दी जाती है।
क्यों पैदा हुए ये हालात?
ग्रामीणों के अनुसार, गाँव के पानी की निकासी जिस निजी तालाब में होती थी, उसे अब पाट दिया गया है। बिना किसी वैकल्पिक योजना के तालाब बंद होने से पूरा पानी सड़कों पर जमा है।
शिकायत का अंबार: ब्लॉक कार्यालय से लेकर ग्राम प्रधान तक कई बार गुहार लगाई गई।
शून्य कार्रवाई: कागजों पर समाधान के दावे हुए, लेकिन धरातल पर एक ईंट तक नहीं रखी गई।
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