


बदायूं 28 अक्टूबर ।
चुनाव से पहले सियासी दलों में उठापटक लाजिमी है लेकिन पूरे मंडल में केवल बदायूं ही ऐसा जिला है, जहां सबसे ज्यादा चेहरों ने पिछले एक पखवाड़े में पार्टी को छोड़ा है।
बदायूं में बीजेपी को लगातार लग रहे सियासी झटकों से पार्टी के सामने स्थानीय राजनीतिक समीकरणों को संभालने की चुनौती खड़ी हो गई है। दो पूर्व विधायक सिनोद शाक्य और कुशाग्र सागर के सपा में शामिल होने के साथ पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष प्रीति सागर, म्याऊं ब्लॉक प्रमुख और वरिष्ठ नेता रवि प्रताप समेत अन्य नेताओं के पाला बदलने से पार्टी को अपने प्रभावशाली चेहरों के साथ जुड़े राजनीतिक आधार को बचाए रखने की चुनौती है।
पार्टी के लिए चिंता की वजह सिर्फ नेताओं का जाना नहीं, बल्कि उनका अपने क्षेत्रों में प्रभाव भी है। ऐसे में स्थानीय राजनीतिक समीकरण बदलने की संभावना रहती है।
गए कई नेता, आया एक भी नहीं –
सबसे बड़ी बात ये रही कि अभी तक बीजेपी से बड़े चेहरों समेत अपनी पहचान रखने वाले दर्जनों कार्यकर्ता जा तो चुके हैं लेकिन यहां का नेतृत्व विरोधी दल से किसी को तोड़कर लाने में अक्षम दिखा है।
दूसरी तरफ लगातार हो रहे दलबदल के बीच स्थानीय नेतृत्व की भूमिका चर्चा में है। नेताओं की नाराजगी समय रहते सामने नहीं आ सकी या उसे दूर करने के प्रयास प्रभावी नहीं रहे। यह सवाल पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक को खटकने लगा है।
इधर, मंगलवार शाम सीएम ने बदायूं के तीनों बीजेपी विधायकों महेश चंद्र गुप्ता, राजीव कुमार सिंह और हरीश शाक्य को लखनऊ बुलाया। माना जा रहा है कि लगातार पार्टी में भगदड़ को लेकर सीएम ने विधायकों से वार्ता कर सटीक खामी पता लगाने की कोशिश की है।
आंवला का असर भी –
आंवला के पूर्व सांसद धर्मेंद्र कश्यप ने भी बीजेपी छोड़कर सपा ज्वाइन की है। चूंकि आंवला लोकसभा में बदायूं की दो विधानसभाएं दातागंज व शेखूपुर आती हैं। ऐसे में यहां भी बीजेपी का नुकसान करने में वो भी अपने स्तर से कमी नहीं छोड़ेंगे।
बिसौली के सपा विधायक आशुतोष मौर्य पिछले राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग के बाद से वह परोक्ष रूप से बीजेपी से जुड़े हैं। लेकिन खुलकर सदस्यता नहीं ली। मुख्यमंत्री स्तर पर तीनों विधायकों के साथ मंथन के बीच अब नजर इस पर टिकी है कि लोकल नेताओं की नाराजगी दूर करने के क्या प्रयास संगठन करेगा।
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