बागपत हादसे ने उजाड़ दीं अल्लापुर चमारी की खुशियां, गलियों में चीख-पुकार और घरों में पसरा मातम।
उझानी, बदायूं 8 सितंबर ।
बागपत में हुए भीषण सड़क हादसे की खबर जैसे ही बदायूं के उझानी कोतवाली क्षेत्र के अल्लापुर चमारी गांव पहुंची, मानो पूरे गांव की खुशियां एक साथ उजड़ गईं। देखते ही देखते गांव की गलियां चीख-पुकार से भर गईं। किसी ने भाई खोया तो किसी के सिर से माता-पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया। सोमवार को गांव के कई घरों से लगातार रोने-बिलखने की आवाजें आती रहीं। मातम ऐसा कि कई घरों में चूल्हे तक नहीं जले।
उझानी- कोतवाली से करीब 7 किलोमीटर दूर बसे अल्लापुर चमारी गांव की आबादी करीब 1800 है। गांव की करीब 90 प्रतिशत आबादी यादव समाज की है। अधिकांश परिवार एक ही कुनबे से जुड़े हैं। इसी गांव से करीब 100 लोग तीन पिकअप वाहनों में सवार होकर राजस्थान के गोगामेड़ी स्थित बागड़ धाम की यात्रा पर गए थे। किसी को अंदाजा नहीं था कि लौटते समय एक पिकअप का पलटना 13 परिवारों की खुशियां हमेशा के लिए छीन लेगा।
सोमवार शाम एसडीएम समेत प्रशासनिक अधिकारी गांव पहुंचे। गांव की स्थिति देखकर वे भी स्तब्ध रह गए। हादसे की जानकारी के बाद अधिकांश ग्रामीण बागपत जा चुके थे। गांव की गलियों में सन्नाटा पसरा था। जिन घरों में लोग मौजूद थे, वहां सिर्फ विलाप सुनाई दे रहा था। महिलाओं और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल था।
सबसे दर्दनाक दृश्य साधु सिंह यादव के घर का था। हादसे में साधु सिंह (65) और उनकी पत्नी मुन्नी देवी (55) की मौत की खबर ने बेटी बीना यादव को भीतर तक तोड़ दिया। माता-पिता को एक साथ खोने का सदमा वह सह नहीं पा रही थी। कभी वह फूट-फूटकर रोने लगती तो कभी अचानक बेहोश हो जाती। आसपास की महिलाएं उसे संभालने और ढांढस बंधाने की कोशिश करती रहीं, लेकिन उसकी आंखों से आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे।
दूसरी ओर प्रेम सिंह के परिवार में भी यही हाल था। परिवार के लोग अपनों को खोने के गम में बार-बार बेसुध हो रहे थे। रिश्तेदार और ग्रामीण उन्हें संभालने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन किसी के पास इस असहनीय दुख को कम करने के लिए शब्द नहीं थे।
अल्लापुर चमारी में सोमवार को न किसी घर में खाना पका और न किसी के चेहरे पर जिंदगी की सामान्य रौनक दिखाई दी। जिन गलियों में रोज बच्चों की आवाजें और लोगों की चहल-पहल रहती थी, वहां सिर्फ सिसकियां सुनाई दे रही थीं। बागपत के इस हादसे ने पूरे गांव को ऐसा जख्म दिया है, जिसकी टीस लंबे समय तक नहीं भरेगी।
राजेश वार्ष्णेय एमके।
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