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CDSCO की जांच में हड़कंप: 199 दवाएं फेल, दिल की दवा में 80% तक कम निकला साल्ट, बच्चों का बुखार वाला सिरप भी अनसेफ

CDSCO की जांच में हड़कंप: 199 दवाएं फेल, दिल की दवा में 80% तक कम निकला साल्ट, बच्चों का बुखार वाला सिरप भी अनसेफ।

नई दिल्ली/ बदांयू 7 सितंबर।

दवा के नाम पर मरीजों को क्या दिया जा रहा है, इसका चौंकाने वाला खुलासा केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन [CDSCO] की रिपोर्ट में हुआ है। संगठन की जुलाई माह की जांच में 199 दवा नमूने मानक गुणवत्ता पर फेल पाए गए हैं। सबसे ज्यादा चिंता की बात ये है कि इसमें दिल, बीपी, शुगर, पेट की बीमारी, एंटीबायोटिक और सबसे ज्यादा बिकने वाली बुखार की दवा पैरासिटामोल भी शामिल है।

दिल की दवा में जानलेवा लापरवाही-
सबसे गंभीर मामला दिल के मरीजों को दी जाने वाली क्लोपिडोग्रेल और एस्पिरिन की संयुक्त गोली का है। फार्मारूट्स हेल्थकेयर, हिमाचल प्रदेश की दवा में क्लोपिडोग्रेल सिर्फ 38.20% और एस्पिरिन सिर्फ 21.8% मिली। यानी दावा जितना था, उसका 70-80% माल ही गायब था। इसमें गोली के घुलने और फ्री सैलिसिलिक एसिड की मात्रा में भी गड़बड़ी मिली। जेएम लेबोरेटरीज की इसी दवा का दूसरा नमूना भी फेल है, जिसमें एस्पिरिन 77.13% ही मिली।

पेट की दवा में दवा ही जीरो-
समय फार्मा इंडिया की पेट की समस्या की दवा आर-जारा डीएसआर कैप्सूल जांच में सबसे ज्यादा चौंकाने वाली रही। इस पर 20 मिलीग्राम रैबेप्राजोल और 30 मिलीग्राम डोमपेरीडोन का दावा था, लेकिन जांच में दोनों की मात्रा 0.0 मिलीग्राम मिली।

बुखार की सबसे आम दवा पैरासिटामोल भी फेल-
बुखार और दर्द में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली पैरासिटामोल की भी कई दवाएं फेल हुई हैं। क्योरटेक फॉर्म्युलेशंस, जेनिथ ड्रग्स और अलवेंटा फार्मा की दवाओं में गोली के ठीक से घुलने की समस्या मिली। वहीं विवेक फार्माकेम के बच्चों वाले पैरासिटामोल सिरप में सूक्ष्मजीव संबंधी जांच में खामी मिली, जो बच्चों के लिए बेहद खतरनाक है।

अन्य दवाओं में भी भारी कमी-
– डिवाइन मेडिकेयर की 300 मिलीग्राम प्रेगाबालिन में सिर्फ 211.16 मिलीग्राम दवा मिली।
– एमके हेल्थकेयर की 100 मिलीग्राम इट्राकोनाजोल में 63.54 मिलीग्राम ही मिली।
– रेल्टसेन हेल्थकेयर की 5 मिलीग्राम रामिप्रिल में सक्रिय पदार्थ सिर्फ 64.20% मिला।
– जेएमएच फार्मा की एंटीबायोटिक डिओमैक्स-एलबी में 250 मिलीग्राम के मुकाबले अमॉक्सिसिलिन 10.86 मिलीग्राम और क्लोक्सासिलिन 67.73 मिलीग्राम ही मिला।

बड़ी कंपनियां भी लपेटे में, एक दवा नकली-
जांच में केवल छोटी कंपनियां ही नहीं, बल्कि लुपिन, सनोफी इंडिया, जायडस हेल्थकेयर, आईपीका लेबोरेटरीज, मैक्लियोड्स, ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन और कैडिला जैसी बड़ी कंपनियों के कुछ बैच भी अलग-अलग जांच में फेल हुए हैं।

एक नमूने को नकली भी घोषित किया गया है। डायबिटीज-ऑल पाउडर में पियोग्लिटाजोन मिला, जो उसके लेबल पर घोषित फॉर्मूले से मेल नहीं खाता था।

CDSCO ने सभी 199 दवाओं की सूची वेबसाइट पर डाल दी है और संबंधित राज्यों को तुरंत कार्रवाई के आदेश दिए हैं।

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