5:43 pm Sunday , 23 August 2026
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सैदपुर की अहले हदीस मस्जिद में मिलादुन्नबी की हैसियत और अहले तौहीद की जिम्मेदारियां मौजू पर एक सेमीनार का आयोजन किया गया।

बिसौली। कस्बा सैदपुर की अहले हदीस मस्जिद में मिलादुन्नबी की हैसियत और अहले तौहीद की जिम्मेदारियां मौजू पर एक सेमीनार का आयोजन किया गया। जिसमें हाफिज साजिद हतरवीं ने कौम और मुल्क के लिए दुआ ए खास कराई।
सेमीनार की शुरुआत कुरआन की तिलावत से की गई। अपने खिताब में मौलाना शमीम अहमद सल्फी साहब ने कहा कि नबी सल. अलैहि वसल्लम की पैदाइश की खुशी तो चचा अबू लहव ने भी मनाई थी। लेकिन नबी सल. अलैहि वसल्लम का बताया अल्लाह का कलमा और तौहीद को कबूल नहीं किया। उन्होंने कहा कि इससे साफ़ पता चला है कि नबी सल. अलैहि वसल्लम की सीरत और तौहीद पर चलना असल ईमान होता है। रहीम दाद खान साहब ने अपनी तकरीर में कहा कि अल्लाह पर सच्चा ईमान और नबी सल. अलैहि वसल्लम की सीरत पर चलना असल ईमान है। हम अपनी जिंदगी को इस्लाम के लिए तबलीग में लगाए और हक पर कायम रहे। इस मौके पर हाजी रजीउद्दीन, हाफिज साजिद, अफजल खान, मुस्तफा खान, तसव्वर खान, असलम वारसी, जुनैद खान, मो. सरवर, मो. इदरीस, तबरेज़ खान, नदीम खान आदि मौजूद रहे।

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