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शहीद हरिओम सिंह की याद में उमड़ा जनसैलाब, तिरंगे के साथ गूंजा भारत माता का जयघोष

शहीद हरिओम सिंह की याद में उमड़ा जनसैलाब, तिरंगे के साथ गूंजा भारत माता का जयघोष

वजीरगंज बदायूं !
हजारों लोगों ने तिरंगा यात्रा में शामिल होकर कारगिल के वीर सपूत को दी श्रद्धांजलि, भारत माता के जयकारों से गूंजा वजीरगंज

वजीरगंज, बदायूं।
कारगिल की बर्फीली चोटियों पर देश की आन, बान और शान के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले वजीरगंज क्षेत्र के वीर सपूत शहीद हरिओम सिंह की स्मृति में गुरुवार को वजीरगंज में देशभक्ति का ऐसा जनसैलाब उमड़ा कि पूरा क्षेत्र तिरंगे के रंग में रंग गया। विकासखंड कार्यालय से निकली विशाल तिरंगा यात्रा में हजारों की संख्या में युवाओं, बुजुर्गों और महिलाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। हाथों में तिरंगा और जुबां पर भारत माता की जय के नारों के साथ निकली यात्रा ने लोगों के भीतर राष्ट्रभक्ति का ज्वार पैदा कर दिया।

तिरंगा यात्रा का नेतृत्व शहीद हरिओम सिंह की धर्मपत्नी एवं वजीरगंज की ब्लॉक प्रमुख गुड्डो देवी तथा उनके पुत्र कुंवर प्रताप सिंह ने किया। विकासखंड कार्यालय से प्रारंभ हुई यात्रा मुरादाबाद-फर्रुखाबाद मार्ग से होती हुई सैदपुर, बगरैन से होकर शहीद के पैतृक गांव हरिओम नगर इटौआ स्थित समाधि स्थल पर पहुंची, जहां यात्रा का समापन हुआ।

यात्रा में युवाओं का जोश देखते ही बन रहा था। डीजे पर बज रहे देशभक्ति गीतों और राष्ट्रभक्ति के नारों के बीच युवा पूरे उत्साह के साथ आगे बढ़ते नजर आए। देशभक्ति गीतों की धुन पर युवा शक्ति के साथ राहगीर भी कदम मिलाते और थिरकते दिखाई दिए। रास्ते में जगह-जगह ग्रामीणों ने पुष्पवर्षा कर तिरंगा यात्रा का भव्य स्वागत किया। गांवों में लोगों ने घरों से निकलकर शहीद को नमन किया और यात्रा में शामिल लोगों का फूल-मालाओं से अभिनंदन किया।

कारगिल की रणभूमि में लिखी थी शहादत की अमर गाथा

शहीद हरिओम सिंह केवल एक सैनिक नहीं, बल्कि देश की मिट्टी का वह लाल थे, जिन्होंने अपना आज देश के आने वाले कल के लिए कुर्बान कर दिया। वर्ष 1999 में पाकिस्तान की सेना और घुसपैठियों ने कारगिल की दुर्गम पहाड़ियों पर कब्जा करने की कोशिश की। भारतीय सेना ने अदम्य साहस और पराक्रम के साथ ऑपरेशन विजय शुरू किया और लगभग तीन महीने तक चली इस जंग में दुश्मन को पीछे हटने पर मजबूर कर दिया। 26 जुलाई 1999 को भारत ने कारगिल युद्ध में विजय प्राप्त की।

इसी ऐतिहासिक युद्ध में वजीरगंज क्षेत्र के गांव इटौआ के वीर सपूत हरिओम सिंह भी दुश्मन से लोहा लेते हुए शहीद हो गए।

1 जुलाई 1999… जब इटौआ ने अपना लाल खोया

1 जुलाई 1999 की तारीख इटौआ और पूरे क्षेत्र के लिए कभी न भूलने वाला दिन बन गई। इसी दिन लांस नायक हरिओम सिंह ने कारगिल की रणभूमि में मातृभूमि की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्योछावर कर दिए। प्रकाशित विवरणों के अनुसार वे 9 पैरा स्पेशल फोर्सेज के जांबाज जवान थे। सेना में रहते हुए उन्होंने ऑपरेशन रक्षक और ऑपरेशन मेघदूत जैसे अभियानों में भी अपनी सेवाएं दी थीं।

उनकी शहादत की खबर जब गांव पहुंची तो हर आंख नम थी, लेकिन इटौआ की मिट्टी को अपने लाल की वीरता पर गर्व भी था। उनका पार्थिव शरीर जब गांव पहुंचा तो तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह ने भी गांव पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की थी। बाद में गांव का नाम उनकी स्मृति में हरिओम नगर इटौआ रखा गया और उनके नाम पर विद्यालय तथा स्मारक भी स्थापित किए गए।

शहीद हरिओम सिंह को उनकी वीरता और बलिदान के लिए स्पेशल सर्विस मेडल से भी सम्मानित किया गया।

समाधि स्थल पर नमन, आंखों में सम्मान

तिरंगा यात्रा जब हरिओम नगर इटौआ स्थित शहीद के समाधि स्थल पर पहुंची तो वातावरण पूरी तरह भावुक हो गया। शहीद हरिओम सिंह की प्रतिमा पर पुष्पमाला अर्पित कर उन्हें नमन किया गया। लोगों ने कुछ क्षण मौन खड़े होकर उस वीर सपूत को याद किया, जिसने अपनी जिंदगी की परवाह किए बिना देश की सीमाओं की रक्षा को अपना सर्वोच्च धर्म माना।

इस अवसर पर लोगों ने कहा कि शहीद हरिओम सिंह का बलिदान किसी एक परिवार की विरासत नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र और देश की अमूल्य धरोहर है। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों को यह संदेश देता है कि राष्ट्र की रक्षा से बढ़कर कोई कर्तव्य नहीं।

तिरंगा यात्रा ने दिया देशभक्ति का संदेश

आज निकली यह तिरंगा यात्रा केवल हाथों में तिरंगा लेकर चलने का आयोजन नहीं थी, बल्कि यह उस वीर सैनिक को सामूहिक श्रद्धांजलि थी, जिसने 1 जुलाई 1999 को कारगिल की धरती पर अपना सर्वस्व भारत माता के चरणों में अर्पित कर दिया था।

हजारों लोगों की मौजूदगी ने यह साबित कर दिया कि शहीद भुलाए नहीं जाते। समय बीत सकता है, पीढ़ियां बदल सकती हैं, लेकिन देश के लिए अपना जीवन न्योछावर करने वाले वीरों की गाथा हमेशा जीवित रहती है।

शहीद हरिओम सिंह आज भी वजीरगंज की मिट्टी के गौरव हैं। उनकी समाधि पर झुकता हर सिर और हाथ में लहराता हर तिरंगा यही कह रहा था—

“जिस मिट्टी ने हरिओम जैसा वीर पैदा किया, वह मिट्टी धन्य है।
जिस मां ने ऐसा लाल जन्मा, वह मां धन्य है।
और जिस देश के लिए उन्होंने अपना जीवन दिया, उस भारत माता को शत-शत नमन।”

शहीद हरिओम सिंह अमर रहें।
भारत माता की जय।
वंदे मातरम्

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