7:15 pm Thursday , 20 August 2026
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बारह रबी उल अव्वल के सिलसिलेवार कार्यक्रमों के तहत रहमत-ए-दो आलम कांफ्रेस का आयोजन किया गया।

बिसौली। नगर में बारह रबी उल अव्वल के सिलसिलेवार कार्यक्रमों के तहत रहमत-ए-दो आलम कांफ्रेस का आयोजन किया गया। जिसमें बड़ी तादात में अकीदतमंद मौजूद रहे। कॉन्फेंस में नातख्वान और उलेमा ए किराम ने अपनी तकरीरें और नात ए पाक पेश की।
नगर की मदीना मस्जिद के कैम्पस में आयोजित रहमत-ए-दो आलम कांफ्रेस की शुरुआत कुरान पाक की तिलावत से हुई। कांफ्रेंस के खुसूसी मेहमान हजरत अल्लामा व मौलाना मुफ्ती शहज़ाद आलम मिस्बाही बरेली शरीफ ने अपनी तकरीर में कहा कि कुरान क्या कहता है ? कुरान कही भी क़त्ल या नफरत की बात नहीं करता। हजरत ने कहा कि इस्लाम मोहब्बत का मजहब है। उन्होंने हर मुसलमान को दीनी और दुनियावी तालीम को हासिल करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जहालत एक गुनाह है और गुनाह जहन्नम की तरफ ले जाता है। मौलाना मिस्बाही ने अपनी तकरीर में कहा कि पैगंबर ए इस्लाम ने अपने पूरे जीवन में इंसानियत, रहम और हमदर्दी का पैगाम दिया। उन्होंने कहा कि गरीबों, यतीमों, बेसहारा लोगों और जरूरतमंदों का ख्याल रखना तथा उनके दुख-दर्द में साथ खड़ा होना एक बड़ी नेक है। जलसे का समापन सलातो-सलाम के साथ हुआ। कांफ्रेंस के निजामत हजरत हाफिज सालिम रजा दानिशी और सदारत हजरत मौलाना रफीक अहमद ने की। कांफ्रेंस में मौलाना अब्दुल मुक्तदिर, मौलाना अब्दुल क़ादिर, मौलाना फुरकान रज़ा, हाफ़िज़ शादाब रज़ा उबैसी, मौलाना रेहान रज़ा, हाफिज़ नदीम रज़ा, हाफ़िज़ नोमान खान, हाफिज़ मज़हर रज़ा, हाफिज़ कमरूज़माँ अशरफ़ी, हाफिज़ जियाउल हसन, हाफ़िज़ तनवीर रज़ा, हाफ़िज़ मेहरबान रज़ा, आकिल रज़ा हस्सानी, मो. फ़ैज़ रज़ा, हाफ़िज असलम रज़ा, हाफ़िज़ दिलनवाज़, हाफ़िज़ सुहैल खान, हाफिज़ अज़हर रज़ा, हाफ़िज़ शादाब खान, कैफ़ रज़ा, सुल्तानी, नूरी कमेटी के मुल्लाजी दिलशाद खान, आमिर खान रज़वी, आदिल, सलाहुद्दीन, साजिद अली, इरशाद अली आदि प्रमुखता से मौजूद रहे।

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