
गीत ऋषि नरेंद्र गरल की दो पंक्तियों ने सोचने पर मजबूर किया – _इतना ही कर लीजिए, भाषा का सम्मान, हिन्दी में ही कीजिए, हस्ताक्षर श्रीमान!_
डॉ. गीतम सिंह बोले – _हिन्दी हमारी शान है, अभिमान है हिन्दी_। डॉ. प्रभाकर मिश्र की गजल – _निगाहों में तुम हो, ख्यालों में तुम हो…_ पर युवा खूब झूमे।
संयोजन प्रधानाचार्य गोपाल शर्मा ने किया। उन्होंने कहा- हिंदी सिर्फ भाषा नहीं, संस्कार है। विजेता छात्रों को पुरस्कृत किया गया। कार्यक्रम में चंद्रशेखर शर्मा, संजीव पाण्डे, सचिन सिंघल, संतोष माहेश्वरी, सुरभि शर्मा समेत पूरा स्टाफ और कक्षा 9 से 12 तक के सैकड़ों छात्र मौजूद रहे।
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