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बिचपुरी गांव में गाय की मौत के बाद विवाद, पुलिस कार्रवाई के विरोध में बजरंग दल का धरना

बदायूं

बिचपुरी गांव में गाय की मौत के बाद विवाद, पुलिस कार्रवाई के विरोध में बजरंग दल का धरना

केशव गुप्ता

डॉक्टर की तहरीर पर चार ग्रामीणों की गिरफ्तारी का विरोध, आलापुर थाना गेट पर पुलिस के खिलाफ नारेबाजी
बदायूं। अलापुर थाना क्षेत्र के ग्राम बिचपुरी, म्याऊं-उसावां मार्ग पर गाय के वाहन से टकराने के बाद शुरू हुआ विवाद अब पुलिस कार्रवाई को लेकर तूल पकड़ता जा रहा है। डॉक्टर की तहरीर पर चार ग्रामीणों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर गिरफ्तारी किए जाने के विरोध में राष्ट्रीय बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने आलापुर थाना गेट के सामने धरना-प्रदर्शन किया और पुलिस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि ग्राम बिचपुरी में हुई घटना के समय डॉक्टर नशे की हालत में वाहन चला रहा था। उनका दावा है कि घटना से संबंधित वीडियो में डॉक्टर की हालत स्पष्ट दिखाई दे रही है। कार्यकर्ताओं के अनुसार वाहन से करीब 12 बीयर की केन मिलने की बात भी सामने आई है। इन्हीं दावों को लेकर प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की कार्रवाई और मेडिकल रिपोर्ट पर सवाल खड़े किए।
मेडिकल रिपोर्ट को लेकर उठाए सवाल
राष्ट्रीय बजरंग दल के कार्यकर्ताओं का आरोप है कि घटनास्थल पर मौजूद पुलिसकर्मी भी डॉक्टर के नशे में होने की बात कह रहे थे, लेकिन बाद में मेडिकल रिपोर्ट में उसके नशे में होने की पुष्टि नहीं होने की बात सामने आई। प्रदर्शनकारियों ने सवाल उठाया कि यदि मौके पर डॉक्टर की हालत को लेकर पुलिसकर्मियों ने भी संदेह जताया था तो मेडिकल रिपोर्ट में स्थिति अलग कैसे सामने आई।
हालांकि डॉक्टर के नशे में होने तथा मेडिकल रिपोर्ट से जुड़े इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पूरे मामले में मेडिकल परीक्षण की रिपोर्ट और जांच के तथ्यों से ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
गाड़ी पलटने के आरोप पर भी सवाल
प्रदर्शनकारियों ने ग्रामीणों द्वारा डॉक्टर की गाड़ी पलटने के प्रयास के आरोप पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि ग्राम बिचपुरी में हुए हादसे के बाद गाय वाहन के पहिए के नीचे फंस गई थी। गाय को निकालने के लिए वाहन को उठाना जरूरी था और मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने भी वाहन को उठाने में मदद की थी।
कार्यकर्ताओं का सवाल है कि यदि वाहन गाय को निकालने के लिए पुलिस की मौजूदगी में उठाया गया था तो इसे ग्रामीणों द्वारा वाहन पलटने के प्रयास के रूप में किस आधार पर दर्ज किया गया। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम की वीडियो फुटेज और मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों के बयान के आधार पर जांच कराने की मांग की।
गाय की मौत के कारणों पर भी उठे सवाल
विवाद की शुरुआत बिचपुरी गांव के पास गाय के वाहन से टकराने और घायल होने से हुई थी। घायल गाय को उपचार के लिए ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। ग्रामीणों और पशु प्रेमियों का सवाल है कि गाय की मौत के वास्तविक कारणों को स्पष्ट करने के लिए पोस्टमार्टम क्यों नहीं कराया गया।
उनका कहना है कि गाय की मौत पूरे विवाद की शुरुआत का अहम हिस्सा थी, इसलिए उसकी मौत के कारणों की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए थी।
‘एक पक्ष पर ही कार्रवाई क्यों?’
राष्ट्रीय बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि पूरे मामले में पुलिस ने डॉक्टर की तहरीर के आधार पर ग्रामीणों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर चार लोगों को गिरफ्तार कर लिया, जबकि डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि बिचपुरी गांव की पूरी घटना की निष्पक्ष जांच कराई जाए। जांच में घटना के वीडियो, डॉक्टर का मेडिकल परीक्षण, वाहन में मिले सामान, मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों के बयान, गाय की मौत से जुड़े तथ्यों और मारपीट के पूरे घटनाक्रम को शामिल किया जाए।
पुलिस का पक्ष
पुलिस अधिकारियों के अनुसार डॉक्टर की तहरीर और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की गई है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल ग्राम बिचपुरी में गाय की मौत से शुरू हुआ विवाद पुलिस कार्रवाई के विरोध में थाना गेट तक पहुंच गया है। धरना-प्रदर्शन के बाद मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का दौर जारी है।

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