11:02 pm Tuesday , 11 August 2026
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सडकों में चाहे गडडे हो या फिर भरा हुआ हो पानी, फिर भी दिल है मेरा बदायूंनी

सडकों में चाहे गडडे हो या फिर भरा हुआ हो, फिर भी दिल है मेरा बदायूंनी
बदायूं की बात – सुशील धींगडा के साथ
किसी क्षेत्र विशेष की नहीं यह कहानी लगभग जनपद के तमाम नगरों, उपनगरों और ग्राम पंचायत तक एक सी दिखाई देती है जहां सडकें बदहाल, गंदगी से बजबजाती नालियां और सडकों पर नालियों का पानी देखने को मिल जाता है तो आम आदमी के दिल के एक बात आती है कि आखिर विकास कहां हो रहा है। धरातल पर विकास कार्य कम दिखते हैं लेकिन क्षेत्र के पालनहारों के जीवन स्तर और आर्थिक स्तर में निरंतर ज्वार भाटा आता दिख रहा है जिसके चलते उनकी तियोरियां दिन दूनी रात चौगनी की कहावत चरितार्थ कर रही हैं। जनपद की राजनीति में यह पहला अवसर दिख रहा है जिसमें पालनहार अपने विरोधियों को का मना करने देने और शासन में मिलने वाली धनराशि को ठिकाने लगाने का आरोप खुले मंच से लगाते और बाद में साथ में विकास की तथाकथित राजनीति पर विचार विमर्श करते अक्सर नजर आ जाते हैं।

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