2:20 pm Sunday , 20 September 2026
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मनुष्य की पहचान उसके कर्मों से होती है – आचार्य संजीव रूप

साप्ताहिक सत्संग में गूंजा संदेश

मनुष्य की पहचान उसके कर्मों से होती है :आचार्य संजीव रूप

बिल्सी , यज्ञ तीर्थ गुधनी स्थित प्रज्ञा यज्ञ मंदिर में रविवार को साप्ताहिक सत्संग का आयोजन श्रद्धा एवं उत्साह के साथ किया गया। कार्यक्रम में वैदिक विद्वान आचार्य संजीव रूप ने “मनुष्य का जीवन और उसके कर्तव्य” विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मनुष्य जीवन केवल अपने सुख के लिए नहीं, बल्कि परिवार, समाज और राष्ट्र के हित में उपयोग करने के लिए मिला है।
आचार्य संजीव रूप ने कहा कि मनुष्य की वास्तविक पहचान उसके पद, धन अथवा बाहरी दिखावे से नहीं, बल्कि उसके श्रेष्ठ विचारों और सद्कर्मों से होती है। प्रत्येक व्यक्ति को अपने परिवार के प्रति जिम्मेदार, समाज के प्रति संवेदनशील और राष्ट्र के प्रति कर्तव्यनिष्ठ होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि व्यक्ति अपने जीवन में सत्य, ईमानदारी, परोपकार, संयम और सेवा को अपनाए तो परिवार में सुख-शांति तथा समाज में आपसी सद्भाव बढ़ सकता है। वैदिक जीवन पद्धति हमें स्वयं के सुधार के साथ-साथ दूसरों के कल्याण की प्रेरणा देती है।
इससे पूर्व पं प्रश्रय आर्य जय ने ऋग्वेद के मंत्रों से यज्ञ कराया । उन्होंने यज्ञ जीवन में क्यों जरूरी है बताया ।
आचार्य तृप्ति शास्त्री ने कहा जो स्त्री धार्मिक व गुणवती होती है उसी का गृहस्थ उत्तम होता है । आर्य संस्कारशाला के बच्चों ने भजन प्रस्तुत किए। उपस्थित श्रद्धालुओं ने वैदिक विचारों को जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।
इस अवसर पर राकेश आर्य, बद्री प्रसाद आर्य, किशनपाल आर्य, श्रीमती कमलेश रानी, श्रीमती संतोष कुमारी, कुमारी कौशिकी , कु० उर्वशी , कु० ताऱ्या आर्य सहित आर्य संस्कारशाला के बच्चे एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।

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