आवारा सांड बना काल, कल्याण चौक पर बेकाबू कार पलटी, दो युवाओं की मौत, दो की हालत गंभीर।
सड़क पर मरने वाला कोई आंकड़ा नहीं, किसी परिवार की पूरी दुनिया उजड़ती है।
उझानी, बदायूं 17 सितंबर ।
बरेली-मथुरा हाईवे पर कल्याण चौक पर बुधवार रात एक दर्दनाक हादसे में दो युवाओं की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। बताया जा रहा है कि सामने अचानक आवारा सांड आ जाने से तेज रफ्तार कार का चालक नियंत्रण खो बैठा और कार अनियंत्रित होकर पलट गई।
हादसे के बाद हाईवे पर चीख-पुकार मच गई। राहगीरों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने घायलों को बाहर निकालकर राजकीय मेडिकल कॉलेज भिजवाया, जहां दोनों की हालत नाजुक बनी हुई है। मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है।
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फिर वही सवाल – कल्याण चौक पर कब तक मौत का इंतजार ?
यह हादसा सिर्फ सांड या तेज रफ्तार की कहानी नहीं है। यह उस खतरनाक चौक की पुरानी कहानी है, जहां मौत बार-बार दस्तक देती है।
2023 में इसी कल्याण चौक पर एथेनॉल से भरा टैंकर तीव्र मोड़ और असमतल सड़क के कारण पलट गया था।
उसके बाद यहां ट्रक पलटने की कई घटनाएं हुईं।
नवंबर 2024 में टेंपो की टक्कर से बाइक सवार गंभीर घायल हुआ।
अगस्त 2026 में भी इसी क्षेत्र में एक युवक की सड़क हादसे में जान चली गई थी।
एक ही जगह पर ट्रक, टैंकर, बाइक और अब कार का हादसाग्रस्त होना सिर्फ संयोग नहीं, बल्कि खतरनाक पैटर्न है।
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सांड तो बहाना है, असली बीमारी सड़क की डिजाइन में है
हर हादसे के बाद सबसे आसान लाइन लिख दी जाती है – तेज रफ्तार थी, सामने जानवर आ गया।
लेकिन बड़ा सवाल यह है कि हाईवे पर आवारा पशु आ कैसे रहे हैं ? और यदि अचानक कोई जानवर या वाहन सामने आ भी जाए तो चालक के पास बचने का विकल्प क्या है ?
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कल्याण चौक पर उझानी, बदायूं और कासगंज तीनों ओर का ट्रैफिक एक साथ मिलता है। स्थानीय चालकों का कहना है कि मुख्य हाईवे पर ही खड़े होकर दूसरी तरफ से आ रहे वाहनों का इंतजार करना पड़ता है। रात में कम ऊंचाई वाले डिवाइडर से सामने के भारी वाहनों की हेडलाइट सीधी आंखों पर पड़ती है और कुछ सेकंड के लिए कुछ दिखता ही नहीं। ऐसे में सामने सांड आ जाए तो हादसा निश्चित है।
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अतिक्रमण, जलभराव और लापरवाही ने बढ़ाया खतरा,
चौक के आसपास सड़क किनारे अतिक्रमण, दुकानों का सामान और जलभराव के कारण चालक की साइट डिस्टेंस पहले ही खत्म हो चुकी है। चौड़ीकरण के दौरान जलभराव की समस्या की खबरें पहले भी प्रकाशित हो चुकी हैं। जब सड़क ही सुरक्षित नहीं, तो सांड तो सिर्फ एक बहाना बन जाता है।
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मुआवजा नहीं, अब रोकथाम चाहिए,
परिवारों को मुआवजा मिलना मानवीय कदम है, लेकिन मुआवजा किसी की जिंदगी वापस नहीं ला सकता। जनता के पैसे से मुआवजा देने से बेहतर है कि जनता की सुरक्षा के लिए सड़क को ठीक किया जाए।
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अब प्रशासन को यह करना होगा-
आवारा पशुओं पर सख्ती हाईवे पर घूम रहे आवारा पशुओं को तत्काल पकड़कर गौशालाओं में भेजा जाए और पशु छोड़ने वालों पर कार्रवाई हो। स्वतंत्र रोड सेफ्टी ऑडिट- जिला प्रशासन, पुलिस और हाईवे एजेंसी मिलकर नहीं, बल्कि स्वतंत्र विशेषज्ञों से कल्याण चौक का ऑडिट कराएं। जंक्शन की ज्योमेट्री, टर्निंग रेडियस, स्पीड, लाइटिंग और साइनेज की जांच हो।
वैज्ञानिक स्पीड मैनेजमेंट- मनमाने स्पीड ब्रेकर नहीं, बल्कि जंक्शन से पहले रेट्रो-रिफ्लेक्टिव बोर्ड, रंबल स्ट्रिप्स, रोड स्टड्स और चेतावनी संकेत लगाए जाएं।
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एक हादसा संयोग हो सकता है, बार-बार हादसा सिस्टम की नाकामी है।
कल्याण चौक अब किसी अगले हादसे का इंतजार नहीं कर सकता। उसे तत्काल वैज्ञानिक सुधार चाहिए।
क्योंकि सड़क पर मरने वाला कोई आंकड़ा नहीं होता, वह किसी परिवार की पूरी दुनिया होता है।
राजेश वार्ष्णेय एमके।
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