8:58 pm Sunday , 13 September 2026
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लखनऊ: CM योगी से सवाल पूछने पर महिला पत्रकार को धमकी, नौकरी से निकाले जाने का दावा वायरल – क्या है पूरा मामला?

लखनऊ 13 सितंबर।

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रेस वार्ता के दौरान सवाल पूछने को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। वायरल वीडियो के मुताबिक पत्रकार दिव्या श्रीवास्तव ने सीएम योगी से सवाल पूछने की कोशिश की, जिसके बाद उन्हें कथित तौर पर धमकाया गया और नौकरी से निकाले जाने का दावा किया जा रहा है।

दिव्या श्रीवास्तव के मुताबिक, वह बीजेपी कार्यालय में आयोजित ‘सेवा संकल्प अभियान’ की प्रेस वार्ता में मौजूद थीं। वह प्रदेश में बारिश के बाद जलभराव, एक्सप्रेस-वे और सरकारी अस्पतालों की सुविधाओं से जुड़े सवाल पूछना चाहती थीं।

वीडियो में दिख रहा है कि सीएम योगी अपना बयान देकर बिना सवाल लिए मंच से जाने लगे, तभी दिव्या ने आवाज लगाकर कहा – “जब सवाल का जवाब नहीं देना तो प्रेस कॉन्फ्रेंस क्यों करते हो?”। इसके बाद सीएम मुस्कुराते हुए निकल गए।

घटना के बाद दिव्या ने रोते हुए वीडियो में कहा – “मैंने योगी आदित्यनाथ से एक सवाल पूछा था। मुझे बीजेपी दफ्तर में घेर लिया। बहुत धमकाया। कहा- बुलडोजर चलेगा घर पर। LIU पीछे पड़ी है। मुझे चैनल से भी निकाल दिया गया।

उन्होंने आरोप लगाया कि सीएम के जाने के बाद खुद को बीजेपी समर्थक बताने वाले कुछ लोगों ने उन्हें घेर लिया और बदसलूकी की।

नौकरी से निकाले जाने के दावे का सच क्या है?

सोशल मीडिया पर दावा वायरल है कि दिव्या को उनके चैनल से निकाल दिया गया है। हालांकि इस दावे पर विरोधाभासी जानकारी सामने आई है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक दिव्या ने ‘द पायनियर’ से बातचीत में इन अफवाहों को खारिज करते हुए कहा कि वे अभी भी अपने नेटवर्क के साथ जुड़ी हुई हैं और काम कर रही हैं। वह लखनऊ की रहने वाली हैं, IGNOU से पत्रकारिता में मास्टर्स कर चुकी हैं और फिलहाल PhD की तैयारी कर रही हैं।

बीजेपी का पक्ष: भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि यह प्रेस वार्ता Q&A के लिए नहीं थी, और वीडियो बनाने के मकसद से विवाद खड़ा किया गया। साथ ही कहा कि अगर धमकी मिली है तो पुलिस में शिकायत करनी चाहिए।

सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा – “नाम बदलने वाले अब ‘प्रेस वार्ता’ का नाम बदलकर ‘प्रेस एकालाप’ कर दें”। यूथ कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने भी इसे प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला बताया है।

क्यों उठ रहे हैं प्रेस स्वतंत्रता पर सवाल?

अगर किसी पत्रकार को सत्ता से सवाल पूछने की कीमत धमकी या नौकरी से हाथ धोकर चुकानी पड़े, तो यह लोकतांत्रिक जवाबदेही के लिए गंभीर संकेत है।

हालांकि, इस पूरे मामले में नौकरी से निकाले जाने की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल किसी बड़े मुख्यधारा संस्थान से नहीं हुई है, और स्वयं पत्रकार द्वारा इससे इनकार की खबर भी सामने आई है। इसलिए वायरल दावे को अंतिम सत्य मानने से पहले आधिकारिक पुष्टि का इंतजार जरूरी है।

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