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बदांयू 21 दिसंबर।
बदायूं में उसहैत पुलिस की अजब-गजब कार्रवाई पर लोगों ने सवालिया निशान लगा दिए ? कानूनन जो जुर्म करें सजा भी उसी को मिलनी चाहिए। मगर उसहैत पुलिस ने नाबालिगों के अपराध के लिए पहले पिता,फिर भाई व अब मांओं को जेल भेज दिया।एक माह में 3 मामले सामने आए हैं, जहां नाबालिगों ने अपराध किए हैं और पुलिस ने उनके परिजनों को जेल भेज दिया है। लोगों ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं ।
लगता है योगी सरकार में बदांयू पुलिस को अतिरिक्त कानून बनाने की छूट मिली हुई है। जहां अपराधियों पर अंकुश नहीं लग पा रहा लगातार छिनेती,लूट , चोरी की घटनाएं हो रही है। उसके लिए बदांयू पुलिस कोई कानून नहीं बना पाई।
पहला मामला- 22 नवंबर उसहैत के चमेली देवी माध्यमिक विद्यालय में कुछ शरारती लड़कों ने छात्राओं की पानी की बोतल में पेशाब कर दिया, शिकायत पर पुलिस ने छात्रों की जगह उनके पिता इशरत, साबिर,शराफत व मोहम्मद अहमद को जेल भेज दिया।
दूसरा मामला – 12 दिसंबर एक नाबालिग छात्रा ने प्रधानमंत्री के फोटो को एडिट कर जुर्म किया,उसकी जगह उसके भाई दुष्यंत को जेल की हवा खिला दी।
तीसरा मामला -17 दिसंबर । कुछ नाबालिग छात्रो पर एक छात्रा ने छेड़-छाड़ की शिकायत की उसहैत पुलिस ने उन बच्चों की मां रेशमा,जमरुद निशा, शबाना व नाहिदा को जेल भेज दिया। उसहैत थाना इंचार्ज ने तर्क़ दिया कि घर के बड़े बच्चों को गलत बातें सिखाते हैं। इसलिए सजा के हकदार हैं।
भारतीय कानून में बच्चों के लिए अलग कोर्ट , अलग जेल बनी हुई है, पहले भी नाबालिग बच्चों को क़ानून ने सजा दी है,इस वक्त भी देश की जेलों में नाबालिग अपनी सजाऐ काट रहे हैं। फिर बदायूं पुलिस को यह अधिकार किसने दिया कि जुर्म करें कोई सज़ा पाऐ कोई ?
क्या आपको लगता है कि पुलिस की कार्रवाई सही है? क्या नाबालिगों के अपराध के लिए परिजनों को जिम्मेदार ठहराना उचित है।
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