कुंवरगांवl सरकार चाहे लाख दावे करे कि ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल रही हैं, लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। कुंवरगांव का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पिछले तीन महीने से बिना डॉक्टर के लावारिस पड़ा है। हालात ऐसे हैं कि मरीजों की जान बचाने की जिम्मेदारी अब डॉक्टर नहीं बल्कि फार्मासिस्ट के कंधों पर टिकी है।
तीन माह पहले यहां प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. जसपाल चौधरी का तबादला पीलीभीत कर दिया गया था। तब से अब तक विभाग ने यहां किसी डॉक्टर की तैनाती जरूरी नहीं समझी। मजबूरी में फार्मासिस्ट संदीप गुप्ता ही मरीजों को देख रहे हैं, जांच कर रहे हैं और दवाएं भी दे रहे हैं। यानी इलाज नाम मात्र का और व्यवस्था रामभरोसे।
स्थिति और गंभीर इसलिए है क्योंकि यहां तैनात लैब असिस्टेंट मंज़र भी जिला महिला अस्पताल में ट्रेनिंग पर भेज दिए गए हैं। नतीजा यह कि पूरा पीएचसी सिर्फ एक फार्मासिस्ट के सहारे चल रहा है। ग्रामीणों की लगातार मांग और गुहार के बावजूद स्वास्थ्य विभाग चुप्पी साधे बैठा है।
सीएचसी बिनावर के अधीक्षक डॉ. नरेंद्र पटेल भी मानते हैं कि पीएचसी डॉक्टर विहीन है। उनका कहना है कि विभागीय अधिकारियों से मांग की गई है, जल्द डॉक्टर तैनात किया जाएगा। लेकिन बड़ा सवाल यही है कि आखिर कब तक ग्रामीणों की जिंदगी दांव पर लगती रहेगी?

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