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अगर आप ले रहे हैं पनीर, मिठाई और दूध,हो जाएं सतर्क- खप रहा मिलावटी मिल्क पाउडर

उझानी बदांयू 24 मई।

जिले भर में 50 से अधिक जगहों पर इस पाउडर से मिलावटी पनीर बनाया जा रहा है। इस मिल्क पाउडर में फैट के लिए रिफाइंड ऑयल और मिठास के लिए सैकरीन का इस्तेमाल हो रहा है, जो लिवर और आंत को सीधे प्रभावित कर रहे हैं। शाकाहारी लोग स्वाद के लिए आजकल पनीर को सबसे अधिक तवज्जो दे रहे हैं
अगर आप दूध-पनीर और छेना की मिठाई के शौकीन हैं तो खाने से पहले एक बार इनके बारे में खुद भी पता कर लें, क्योंकि आपको मिलावटी सामान खिलाया जा रहा है। शहर में करीब 5 बड़े दुकानदार केवल अब दूध के लिए पाउडर ही बेचते हैं।


इनकी दुकान व गोदाम से हर दिन 5 क्विंटल से ज्यादा मिल्क पाउडर की बिक्री हो रही है। इसका इस्तेमाल चाय की दुकानों पर दूध व मिठाई बनाने में हो रहा है। ऐसे में ये उत्पाद कितने गुणवत्तापूर्ण होंगे, आसानी से समझा जा सकता है। इस मिल्क पाउडर में फैट के लिए रिफाइंड ऑयल और मिठास के लिए सैकरीन का इस्तेमाल हो रहा है, जो लिवर और आंत को सीधे प्रभावित कर रहे हैं।

मिलावट की स्थिति यह है कि अकेले उझानी में हर दिन करीब 2 से तीन क्विंटल पनीर की खपत हो रही है। सहालग में यह ओर बढ़ जाती है।

सूत्र बताते हैं कि अब ग्रामीण क्षेत्रों में भी नकली पनीर की भट्टियां सुलगने लगी है, बाइक व साइकिल से धंधेबाज नक़ली पनीर व खोवा शहर के बाजार में बेच जाते हैं।
मिठाई बनाने के कारीगर ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि एक किलो पनीर बनाने में करीब 250 ग्राम पाउडर की जरूरत होती है। पाउडर को अच्छी तरह से घोलने के बाद इसमें नींबू का रस मिलाया जाता है, जिससे वह दही जैसा बन जाता है। इसे कपड़े में बांधकर ठंडे पानी में डुबोया जाता है।

इसके बाद फ्रिज में रख दिया जाता है। इस तरह से तैयार पनीर में करीब 200 ग्राम पानी और 800 ग्राम ठोस पदार्थ होता है। बाजार में पनीर व छेना की मिठाई बनाने के लिए अलग मिल्क पाउडर है, जिसकी कीमत 270 से 300 रुपये प्रति किलोग्राम है।
वहीं, चाय वाला मिल्क पाउडर भी 300 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास है। इनमें ब्रांडेड से लेकर लोकल कंपनियाें तक के उत्पाद शामिल हैं। यह पाउडर पांच व 10 किलोग्राम के पैकेट में है। वहीं, एक किलोग्राम व 500 ग्राम वाले मिल्क पाउडर भी हैं, जिनकी कीमत 500 से 600 रुपये प्रति किलोग्राम है।

चिकनाई के लिए डालते हैं रिफाइंड
मिल्क पाउडर को बनाने के लिए उसे फैट शून्य करना पड़ता है। केवल डेनमार्क से आने वाले उच्च श्रेणी के मिल्क पाउडर में ही कुछ मात्रा में फैट पाया जाता है। इसीलिए पाउडर से दूध बनाते समय उसमें फैट के लिए रिफाइंड ऑयल डाल दिया जाता है।
इसे अधिक सफेद बनाने के लिए व्हाइटनर का इस्तेमाल होता है। अगर पाउडर से केवल चाय के लिए दूध बनाना हो तो उसमें रिफाइंड की जगह सैकरीन का इस्तेमाल होता है, ताकि दूध में मिठास बनी रहे। इसके अलावा मिठाई बनाने के लिए तैयार दूध में भी सैकरीन का इस्तेमाल होता है।

बोले डाॅक्टर-
लिवर को खराब कर देगा यह पनीर
रिफाइंड और अन्य केमिकल से बने पनीर को खाने से लिवर पर सीधा असर पड़ेगा। इसमें पड़ा रिफाइंड लिवर में चिकनाहट लाएगा, जिससे फैटी लिवर की समस्या आएगी। इसके अलावा इस तरह का पनीर खाने से अपच और गैस्ट्रिक की समस्या आ सकती है। लिवर संक्रमित होने पर भोजन के पाचन की प्रक्रिया बिगड़ जाती है, जिसका असर शरीर की अन्य सभी गतिविधियों पर पड़ता है- डॉ.इवा फरमान , वरिष्ठ पेट रोग विशेषज्ञ।

राजेश वार्ष्णेय एमके।

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