Madhuri प्रेम सरेआम नहीं बस अहसास होना चाहिए हम उन्हें चाहते है ये बात सिर्फ उन्हें पता होनी चाहिए
Read More »बिना मिले – Pushpa
Pushpa फूल बनकर मुस्कुराना जिन्दगी है, मुस्कुरा के गम भूलाना जिन्दगी है, मिलकर लोग खुश होते है तो क्या हुआ, बिना मिले दोस्ती निभाना भी जिन्दगी है!
Read More »चलो चलें – Rinku Sharma
Rinku Sharma #चलो #चलें उस #जहाँ में…….💞 💖 #जहाँ #रिश्तों का #नाम नहीं #पूछा जाता ❣️ #जहाँ #धड़कनों पर कोई #बंदिश नहीं #खवाबों पर कोई #इल्ज़ाम नहीं आता…….❤️ शुभ रात्रि वंदन X मेट्स दोस्तों #राधे_राधे ❤️🩹
Read More »तुम्हारे अलावा- PRIYA SHARMA
PRIYA SHARMA अब कोई नही है मेरे पास तुम्हारे 🧔अलावा जिस से मै अपना दिल♥ का हाल बता सकूँ। इसलिए मुझे कभी मेरे हाल पर मत छोड़ना। तेरे यारा तु है सबसे प्यारा
Read More »बस तू बांकी- neelam
neelam मैं लुटा चुकी अपना सब कुछ अब मुझमें बस तू बांकी है, दुनिया कहती बरबाद है मुझको देख के मुझमें तू बांकी है, आजमाइश के बाजार में खड़ा रहा बीचों-बीच सबने लगा दी बोली बस तू बांकी है, फर्क नहीं पड़ा किसी के जाने से गुरूर था मेरा ये, …
Read More »शुभ_प्रभात_वंदन_शुक्रवार
Rinku Sharma #शुभ_प्रभात_वंदन_शुक्रवार माता लक्ष्मी उस हृदय की ओर स्वतः आकर्षित होती हैं जहाँ सच्चाई, परिश्रम, विनम्रता और शुभ संकल्प बसे होते हैं. लक्ष्मी जी का आशीर्वाद वहीं टिकता है जहाँ स्वच्छ मन, अच्छे कर्म और सद्विचार हों. 🙏🌺#जय_मां_लक्ष्मी 🌺🙏
Read More »जय_मां_महालक्ष्मी- राशि
Rashee राशि❣️ नमस्ये सर्वलोकानां जननीमब्जसम्भवाम् । श्रियमुन्निद्रपद्माक्षीं विष्णुवक्षःस्थलस्थिताम्।। 🥀#लक्ष्मी_नारायण_नम:🥀 🌺#जय_मां_महालक्ष्मी🌺 🙏#प्रातः_वंदन🙏
Read More »मेरी पहचान – Pooja Tiwari
Pooja Tiwari नदी का रुख़ मुड़े, या बुझ जाए दीयों की टिमटिम, बदल जाए चाहे बरखा की वो मदहोश रिमझिम। ज़माना तो है मुसाफ़िर, बदलता ही रहेगा, बदलेगी ना मगर मेरी वफ़ा, है जो ला-फ़ानी-ए-अज़ीम। ✨✍️ वक्त की रफ़्तार अपनी जगह, पर रूह की वफ़ा अपनी जगह। 2026 के बदलते …
Read More »बचपना इतना- Koki Tyagi
Koki Tyagi बचपना इतना कि मिट्टी से भी खेल लूँ…अगर बात स्वाभिमान पर आ जाए तो चाँद को भी नज़र अंदाज़ कर दूँ 🙂
Read More »बदले की भावना- Mona
Mona (संप्रेषण) बदले की भावना से सम्बन्ध न ही निभते हैं, और न ही टिकते हैं किसी के। जिसे चाहो, जिसके तुम होना चाहो, उसे समर्पित कर दो खुद को, अपना मन, वचन और सब कुछ. . . यही निश्चल संबन्ध रूपी पौधे के विशाल वृक्ष होने की सच्ची भूमि …
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