बदायूं में BJP को बड़ा झटका! सिनोद शाक्य की सपा में घर वापसी, कुशाग्र सागर ने भी थामा अखिलेश का साथ; OBC समीकरण में हलचल
केशव गुप्ता
लखनऊ/बदायूं। उत्तर प्रदेश की राजनीति में बदायूं से जुड़ा बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया है। दो बार के पूर्व विधायक सिनोद शाक्य ने समाजवादी पार्टी में घर वापसी कर ली है, जबकि बिसौली के पूर्व विधायक कुशाग्र सागर ने भी सपा की सदस्यता ग्रहण कर ली। दोनों नेताओं के पार्टी में शामिल होने से बदायूं के राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। इसे जिले में सपा की ताकत बढ़ाने और आगामी चुनावों के मद्देनजर नए सियासी समीकरण बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
लखनऊ स्थित समाजवादी पार्टी कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव मौजूद रहे। पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव शिवपाल सिंह यादव ने दोनों नेताओं का स्वागत किया और मंच पर अपनी बगल में पहली पंक्ति में बैठाकर सम्मान दिया। इस घटनाक्रम को बदायूं की राजनीति में सपा के लिए अहम माना जा रहा है।
सिनोद शाक्य की सपा में वापसी को खास तौर पर पिछड़ा वर्ग के राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है। वह पहले बसपा से विधायक रह चुके हैं और बाद में समाजवादी पार्टी में रहने के बाद भाजपा में शामिल हुए थे। अब उनकी सपा में वापसी से जिले में राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। सिनोद शाक्य की मौर्य, शाक्य, कुशवाहा और सैनी समाज में अच्छी पकड़ मानी जाती है। ऐसे में सपा को उम्मीद है कि उनकी मौजूदगी से पिछड़ा वर्ग के मतदाताओं के बीच पार्टी की स्थिति मजबूत हो सकती है। बदायूं की राजनीति में इन समुदायों की भूमिका को देखते हुए उनकी वापसी को महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है।
वहीं, बिसौली के पूर्व विधायक कुशाग्र सागर के सपा में शामिल होने से पार्टी को क्षेत्र में एक और प्रमुख चेहरा मिला है। उनकी एंट्री से संगठन को मजबूती मिलने और युवा समर्थकों के बीच पार्टी की सक्रियता बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। दोनों नेताओं के एक साथ सपा में आने से जिले में पार्टी की रणनीति को नई दिशा मिल सकती है।
राजनीतिक नजरिए से देखें तो सिनोद शाक्य की वापसी और कुशाग्र सागर के पार्टी में शामिल होने से भाजपा के सामने बदायूं में नई चुनौती खड़ी होने की चर्चाएं हैं। हालांकि, इसका वास्तविक असर आगामी चुनावों में ही स्पष्ट होगा। अब सबकी निगाहें इस बात पर रहेंगी कि समाजवादी पार्टी इन नेताओं के जनाधार को संगठन के पक्ष में किस तरह इस्तेमाल करती है और बदायूं के राजनीतिक समीकरणों में कितना बदलाव आता है।
कुल मिलाकर, बदायूं में सिनोद शाक्य की घर वापसी और कुशाग्र सागर की सपा में एंट्री ने जिले की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। अब सवाल यही है कि क्या इन दोनों नेताओं का साथ समाजवादी पार्टी को मजबूती देगा और OBC समीकरणों में कोई बड़ा बदलाव लाएगा? इसका जवाब आने वाले दिनों में राजनीतिक गतिविधियों और चुनावी नतीजों से सामने आएगा।
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