बिल्सी विधानसभा में सियासी भूचाल: हवा नहीं, आंधी है… नाम है ठाकुर योगेंद्र सिंह तोमर।
बदायूं 20 अक्टूबर ।
बिल्सी की सियासत में इस वक्त जो हो रहा है, उसे चर्चा नहीं, संकेत समझिए। चाय के खोखे से लेकर बाजार की चौपाल तक, खेत से खलिहान तक अगर एक ही नाम सबसे ज्यादा गूंज रहा है तो वो है – ठाकुर योगेंद्र सिंह तोमर।
मौजूदा राजनीतिक हालात, जमीनी पकड़ और जनता के रुझानों पर बारीकी से गौर करें तो साफ दिखता है – तोमर साहब सिर्फ मजबूत नहीं, सबसे भारी हैं।
बिल्सी विधानसभा हमेशा से समीकरणों से नहीं, स्वभाव से जीती जाती है। यहां जनता नेता नहीं, अपना बेटा, अपना भाई चुनती है। और इसी कसौटी पर ठाकुर योगेंद्र सिंह तोमर बाकी सबसे कोसों आगे निकलते दिख रहे हैं।
उत्तर प्रदेश की इस प्रतिष्ठित सीट पर समाजवादी पार्टी के टिकट को लेकर जबरदस्त सुगबुगाहट है, लेकिन जमीन पर सर्वे कुछ और ही कहानी कह रहा है। जनता ने मन बना लिया है, बस औपचारिक ऐलान बाकी है।
तोमर ही क्यों? – 3 वजहें जो बिल्सी जानता है
1-कागज पर नहीं, जमीन पर नेता: तोमर एसी वाले कमरों के नेता नहीं हैं। वो उस नेता का नाम है जो रात 12 बजे भी किसी के दरवाजे पर खड़ा मिल जाता है। उनकी जनसंपर्क की शैली नहीं, जन-परिवार की शैली है।
2-सर्व-स्वीकार्य चेहरा: ठाकुर समाज में अभेद्य पकड़, तो युवाओं में यूथ आइकॉन जैसी छवि। बुजुर्ग उन्हें अपना तो युवा अपना भविष्य देखता है। यही सर्व-समाज की स्वीकार्यता उन्हें भीड़ से अलग, सबसे बड़ा चेहरा बनाती है।
3-संगठन नहीं, जनसंगठन: उनके साथ कार्यकर्ता नहीं, एक कारवां चलता है। वो भीड़ नहीं जुटाते, भीड़ खुद उनके साथ हो लेती है। यही जमीनी ताकत किसी भी दल के लिए जिताऊ फैक्टर होती है।
राजनीतिक जानकारों की मानें तो अगर सपा ने इस जनभावना पर मुहर लगाई और ठाकुर योगेंद्र सिंह तोमर को मैदान में उतारा, तो बिल्सी की सीट न सिर्फ सपा की झोली में होगी, बल्कि पूरे जिले की सबसे बड़ी जीत में शुमार होगी।
इधर जैसे ही यह सियासी हवा उनके खेमे तक पहुंची, समर्थक खुशी से उछल ही पड़े – बोले, “ये टिकट की दौड़ नहीं, बिल्सी के दिल की आवाज है। तोमर आएगा, तो बिल्सी में छाएगा!
निष्कर्ष साफ है – बिल्सी में लहर नहीं, तोमर लहर है।
BDN INDIA NEWS की ग्राउंड रिपोर्ट।
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