एस्सेल स्कूल में दशहरा उत्सव की धूम, धू-धू कर जला अहंकार का रावण।
– सच्चाई और अच्छाई का हुआ जयघोष, नन्हे राम-लक्ष्मण ने दिया अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश
– अक्षत और रिधम बने राम-लक्ष्मण, अनाया अग्रवाल ने निभाई माता सीता की भूमिका।
उझानी (बदायूं) 19 अक्टूबर ।
नन्हे चेहरों पर उत्साह की चमक, आंखों में श्रीराम के आदर्शों की प्रेरणा और पूरे परिसर में सत्य की विजय का उल्लास। सोमवार को एस्सेल स्कूल, उझानी में दशहरा उत्सव बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।
विजयादशमी के उपलक्ष्य में विद्यालय परिसर में बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय के प्रतीक रावण के पुतले का दहन किया गया। जैसे ही रावण का पुतला धू-धू कर जला, बच्चों की तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा मैदान “जय श्रीराम” के जयघोष से गूंज उठा।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण नन्हे कलाकारों की मनमोहक प्रस्तुति रही। दो सगे भाइयों अक्षत और रिधम ने भगवान श्रीराम और लक्ष्मण की भूमिका निभाई, जबकि अनाया अग्रवाल माता सीता के रूप में नजर आईं। तीनों की वेशभूषा और भावपूर्ण प्रस्तुति ने रामायण के आदर्शों को जीवंत कर दिया।
उत्सव में अविन, रेयांश, सुधाकर, प्रियंका, मिशिका, शान्वी, आरोही, कौशिकी, तृषा और डिंपल सहित अन्य नन्हे विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।
विद्यालय के प्रबंध निदेशक सुधांशु गुप्ता ने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा, “रावण केवल एक पुतला नहीं, बल्कि हमारे भीतर छिपे अहंकार, क्रोध, ईर्ष्या और असत्य का प्रतीक है। वास्तविक विजयदशमी तभी है, जब हम अपने भीतर की बुराइयों पर विजय प्राप्त करें।
भगवान श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहे जाने का अर्थ समझाते हुए उन्होंने कहा, “जिस प्रकार नदी अपने दो किनारों की मर्यादा में बहते हुए जीवनदायिनी बनती है, उसी प्रकार भगवान श्रीराम ने जीवन की कठिनतम परिस्थितियों में भी अपने कर्तव्यों और मर्यादाओं का पालन किया। कभी अपने आदर्शों से समझौता नहीं किया। इसी उत्तम आचरण के कारण वे मर्यादा पुरुषोत्तम हैं।
उन्होंने कहा कि सत्य का मार्ग कठिन हो सकता है, लेकिन अंतिम विजय सत्य की ही होती है। इसलिए परिस्थिति कैसी भी हो, अपने संस्कार और आत्मविश्वास कभी नहीं छोड़ना चाहिए।
प्रधानाचार्य विमल सिंह और पूजा यादव ने भी बच्चों को विजयदशमी के सांस्कृतिक महत्व से अवगत कराते हुए श्रीराम के आदर्शों को जीवन में अपनाने की प्रेरणा दी।
कार्यक्रम को सफल बनाने में अक्षय सक्सेना, रितिका शर्मा, प्रियंका साहू, अनामिका, हिमांशी साहू, मेघा, लवी, कसक, सोनी, कुसुम, रोशन, कशिश सहित समस्त विद्यालय परिवार का सहयोग रहा।
एस्सेल का संदेश – हर बच्चे के भीतर जागे एक राम, हर मन से मिटे बुराई का नाम।
राजेश वार्ष्णेय एमके\

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