1:43 pm Saturday , 19 September 2026
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₹2 हजार से ऊपर UPI पेमेंट पर बदलेगा नियम, जानिए किसे देना होगा शुल्क

बदायूं

₹2 हजार से ऊपर UPI पेमेंट पर बदलेगा नियम, जानिए किसे देना होगा शुल्क

केशव गुप्ता

नई दिल्ली। भारत में डिजिटल भुगतान के सबसे प्रमुख माध्यम UPI को लेकर नए नियमों की घोषणा की गई है। हालांकि इसे नया “UPI अधिनियम” नहीं कहा जा सकता। UPI भुगतान व्यवस्था Payment and Settlement Systems Act, 2007 के नियामकीय ढांचे के तहत संचालित होती है और NPCI इसके संचालन से जुड़े नियम जारी करता है।
नए Merchant Discount Rate (MDR) ढांचे के तहत 15 अक्टूबर 2026 से चुनिंदा Person-to-Merchant (P2M) UPI लेनदेन पर ₹2,000 से अधिक की राशि होने पर 0.4 प्रतिशत तक MDR लागू होगा। ₹75,000 या उससे अधिक के पात्र लेनदेन पर यह शुल्क अधिकतम ₹300 प्रति लेनदेन तक सीमित रहेगा।
आम लोगों के लिए राहत
नियम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि Person-to-Person (P2P) यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को UPI के जरिए पैसा भेजने पर MDR नहीं लगेगा। राशि चाहे ₹2,000 से अधिक ही क्यों न हो, P2P भुगतान मुफ्त रहेगा।
इसी तरह ₹2,000 तक के निर्धारित व्यापारी UPI भुगतानों पर भी MDR नहीं लगेगा। नए शुल्क का संबंध मुख्य रूप से निर्धारित व्यापारी भुगतानों से है, न कि आम ग्राहक द्वारा UPI इस्तेमाल करने पर सीधे लगाए जाने वाले चार्ज से।
उदाहरण से समझिए
यदि कोई व्यक्ति अपने दोस्त को ₹10,000 UPI से भेजता है तो यह P2P लेनदेन है और इस पर नया MDR नहीं लगेगा।
वहीं किसी पात्र व्यापारी को ₹10,000 का UPI भुगतान होने पर 0.4 प्रतिशत के हिसाब से ₹40 MDR बन सकता है। यह merchant/payment ecosystem के स्तर का शुल्क है, ग्राहक से अलग से ₹40 वसूलने वाला UPI चार्ज नहीं।
इस बदलाव का उद्देश्य UPI भुगतान व्यवस्था के बुनियादी ढांचे, साइबर सुरक्षा, तकनीकी क्षमता और ग्राहक सेवा से जुड़े खर्चों के लिए भुगतान तंत्र को मजबूत करना बताया गया है।
निष्कर्ष: UPI पूरी तरह बंद या सामान्य उपभोक्ताओं के लिए चार्जेबल नहीं हुआ है। नए ढांचे में मुख्य बदलाव चुनिंदा ₹2,000 से अधिक के व्यापारी भुगतानों पर MDR से संबंधित है, जबकि व्यक्ति-से-व्यक्ति UPI भुगतान मुफ्त रहेगा।

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