बदायूं। उ.प्र. उद्योग व्यापार मण्डल, जनपद बदायूं के जिलाध्यक्ष के. बी. गुप्ता ने देश के छोटे, खुदरा एवं मध्यम व्यापारियों के हित में ₹2,000 से अधिक के UPI लेन-देन पर प्रस्तावित MDR/शुल्क वापस लेने तथा UPI भुगतान व्यवस्था को व्यापारियों के लिए निःशुल्क बनाए रखने की मांग की है।
के. बी. गुप्ता ने कहा कि छोटे व्यापारी बढ़ती प्रतिस्पर्धा, ई-कॉमर्स, दुकान संचालन की लागत, किराया, बिजली, कर्मचारियों के वेतन और सीमित लाभांश जैसी आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। ऐसे में डिजिटल भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क उनके लिए आर्थिक बोझ बढ़ा सकता है।
उन्होंने कहा कि UPI ने डिजिटल भुगतान को सरल, तेज और व्यापक बनाया है। छोटे से छोटे दुकानदार ने भी राष्ट्रहित में इसे अपनाया है, जिससे नकद लेन-देन पर निर्भरता कम हुई और व्यापारिक भुगतान अधिक सुविधाजनक एवं पारदर्शी बने हैं।
उन्होंने चिंता जताई कि ₹2,000 से अधिक के UPI लेन-देन पर MDR अथवा अन्य शुल्क लगाए जाने से कम मार्जिन पर काम करने वाले व्यापारियों की आय प्रभावित होगी। इससे व्यापारी और ग्राहक पुनः नकद भुगतान की ओर जा सकते हैं, जो डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के उद्देश्य के विपरीत होगा।
उन्होंने मांग की कि UPI को डिजिटल अर्थव्यवस्था की आधारभूत व्यवस्था मानते हुए छोटे एवं मध्यम व्यापारियों के हितों की रक्षा की जाए तथा शुल्क नीति में किसी भी बदलाव से पहले व्यापारी संगठनों से व्यापक विचार-विमर्श किया जाए।
हमारी प्रमुख मांगें
1. ₹2,000 से अधिक के UPI लेन-देन पर प्रस्तावित MDR/शुल्क वापस लिया जाए।
2. छोटे एवं मध्यम व्यापारियों के लिए UPI भुगतान व्यवस्था निःशुल्क रखी जाए।
3. UPI से संबंधित शुल्क नीति में बदलाव से पहले व्यापारी संगठनों से व्यापक विचार-विमर्श किया जाए।
4. कम लाभांश पर कार्य करने वाले छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त डिजिटल भुगतान लागत न डाली जाए।
5. डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए वर्तमान सरल एवं किफायती व्यवस्था बनाए रखी जाए।
के. बी. गुप्ता ने अनुरोध किया कि देश के करोड़ों छोटे एवं मध्यम व्यापारियों के हित में सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए ₹2,000 से अधिक के UPI लेन-देन पर किसी भी अतिरिक्त शुल्क/MDR की व्यवस्था वापस लेने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई की जाए।
bdnindia.com bdnindia.com | www.bdnindia.com


