बदायूं से कछला गंगा मार्ग पर रावण वेश में दिखे शिवभक्त,भक्ति और अनुशासन का दिया संदेश।
बदांयू 2 अगस्त।
सावन के महीने में बदायूं से कछला गंगा तक चल रही कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धा का एक अनोखा रंग देखने को मिला। यात्रा के दौरान लखीमपुर खीरी से आए शिवभक्त संजय रावण का वेश धारण कर हाथ में शिवलिंग लेकर कांवड़ पटरी से गुजरे। उन्हें देखने के लिए सड़क किनारे लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी और कई श्रद्धालु उनके साथ सेल्फी व वीडियो बनाते नजर आए।
सावन में बदायूं-कछला मार्ग और हाईवे पर हजारों शिवभक्त गंगाजल लेकर अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे हैं। पूरे रास्ते ‘बम-बम भोले’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से माहौल भक्तिमय बना हुआ है।
रावण का रूप क्यों धारण किया?
संजय ने बताया कि उन्होंने लंकापति रावण का रूप इसलिए धारण किया क्योंकि रावण भगवान शिव के सबसे बड़े भक्तों में से एक माने जाते हैं। उन्होंने कछला से गंगाजल उठाकर कांवड़ यात्रा शुरू की है। यह उनकी तीसरी कांवड़ यात्रा है।
संजय ने सभी कांवड़ियों से यात्रा के दौरान नशे से दूर रहने और पूरी श्रद्धा, अनुशासन व मर्यादा के साथ कांवड़ यात्रा करने की अपील की। उनका कहना है कि कांवड़ यात्रा आस्था और भगवान शिव की भक्ति का पर्व है, इसलिए इसे शांतिपूर्ण तरीके से पूरा करना चाहिए।
इस बार बदायूं-कछला मार्ग पर कई कांवड़िए अपने अलग-अलग रूपों से लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। इससे पहले भी 51 किलो लोहे की जंजीरें पहनकर कैदी के वेश में और बेटियों के सम्मान का संदेश देते हुए कांवड़िए यात्रा करते देखे गए हैं।
रावण के वेश में निकले संजय को देखने के लिए रास्ते भर लोगों की भीड़ जुटती रही। आस्था और अनोखे स्वरूप का यह संगम अब बदायूं से कछला गंगा की कांवड़ यात्रा में चर्चा का विषय बना हुआ है।
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