बदायूँ के एचपी इंटरनेशनल स्कूल में प्रार्थना सभा बनी ‘स्वास्थ्य क्रांति’ की मिसाल!
बदायूँ के एचपी इंटरनेशनल स्कूल में आज सुबह की शुरुआत कुछ ऐसी हुई, जिसने हर चेहरे पर मुस्कान और हर दिल में एक सवाल जगा दिया। जैसे ही प्रार्थना सभा शुरू हुई, मंच पर एक-एक कर सेब, केला, संतरा और अंगूर “चलते-फिरते” दिखाई देने लगे—दरअसल ये नन्हे-मुन्ने छात्र थे, जिन्होंने फलों की रंग-बिरंगी वेशभूषा पहनकर “स्वस्थ रहो, तंदुरुस्त रहो” का ऐसा संदेश दिया, जिसने पूरे माहौल को एक जागरूकता अभियान में बदल दिया। छात्रों के हाथों में बने पोस्टर, उनके मासूम चेहरे और आत्मविश्वास से भरे संदेश—सब मिलकर जैसे यह कह रहे थे कि तंदुरुस्ती कोई बोझ नहीं, बल्कि एक सुंदर आदत है। उस पल वहाँ मौजूद हर शिक्षक के चेहरे पर संतोष साफ झलक रहा था, मानो भविष्य की एक मजबूत नींव उनकी आँखों के सामने तैयार हो रही हो।
इस खास अवसर पर विद्यालय के प्रबंधक निदेशक शिवम पटेल ने कहा कि आज के समय में बच्चों को शुरुआत से ही स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाना बेहद जरूरी है, क्योंकि यही उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से मजबूत बनाएगा। वहीं प्रधानाचार्य संदीप पांडे ने छात्रों को प्रेरित करते हुए कहा कि तंदुरुस्त रहना केवल एक आदत नहीं, बल्कि जीवन जीने का तरीका होना चाहिए। शिक्षकों ने भी स्वस्थ जीवनशैली अपनाने पर जोर दिया। लेकिन इस पूरी पहल के बीच एक सवाल हवा में तैरता रह गया—क्या हम सच में अपनी सेहत को उतनी अहमियत दे रहे हैं, जितनी ये नन्हे बच्चे हमें सिखा रहे हैं… या फिर हम अब भी अपनी ही लापरवाही में खोए हुए हैं?



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