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बदांयू 16 नवंबर।
बदांयू जिले में फर्जी चिकित्सकों और फर्जी अस्पतालों का जाल बिछा हुआ है। विभागीय सूत्र बताते हैं कि पिछले तीन साल में लगभग 100 अस्पतालों का पंजीयन कम हुआ है। बावजूद शहर से लेकर गांव तक बिना पंजीकरण के अस्पताल, लैब और अल्ट्रासाउंड सेंटर धड़ल्ले से चल रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि यह सब स्वास्थ्य विभाग की नाक के नीचे, उसके संरक्षण में फल-फूल रहे हैं। मरीजों की जान से खिलवाड़ हो रहा है, लेकिन कार्रवाई नाम मात्र की है।
हाल में ही एसीएमओ डॉ. मोहन झा ने उझानी के आशीर्वाद हॉस्पिटल का निरीक्षण किया था। वहां न तो कोई अभिलेख मिला और न ही डॉक्टर। ऐसे में उन्होंने नोटिस थमा दिया । लेकिन कार्रवाई आज तक नहीं हुई और अस्पताल धड़ल्ले से संचालित है।
शहर सहित जिले के उझानी, बिल्सी, सहसवान, बजीरगंज, दातागंज, बिनावर, व देहात क्षेत्र जैसे इलाकों में फर्जी अस्पतालों का पूरा नेटवर्क फैला हुआ है। यहां अयोग्य लोग खुद को डॉक्टर बताकर मरीजों का इलाज करते हैं। बिना डिग्री वाले लोग अल्ट्रासाउंड व एक्स-रे कर रहे हैं। झोलाछाप मरीजों का उपचार कर उन्हें दवाएं देते हैं और फीस वसूलते हैं।
कई बार तो मरीजों की हालत बिगड़ जाती है, लेकिन जिम्मेदारी कोई नहीं लेता। विभाग के पिछले तीन साल के अस्पताल पंजीकरण के आंकड़ों पर गौर करें तो खेल का साफ पता चलता है। यानी लगभग 100 अस्पतालों को पंजीकरण नहीं मिला।
अब अगर जिले की बात करें तो सेकंडों की संख्या में अस्पताल, क्लीनिक और लैब बिना लाइसेंस के चल रहे हैं। विभाग की टीम कभी-कभी छापा मारती है, लेकिन जुर्माना लेकर छोड़ देती है। फर्जी डॉक्टर फिर से धंधा शुरू कर देते हैं। अगर सील किया तो नाम व जगह बदल कर स्वास्थ्य विभाग के गठजोड़ से काम शुरू कर देते हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में हाल और बदतर
गांवों में तो स्थिति और भयावह है। छोटे-छोटे कमरों में डॉक्टर का बोर्ड लगा होता है। बिना ट्रेनिंग वाले लोग इंजेक्शन लगाते हैं, ऑपरेशन करते हैं। गर्भवती महिलाओं का अल्ट्रासाउंड बिना योग्यता वाले करते हैं, जिससे बच्चे और मां दोनों की जान खतरे में पड़ती है। आश्चर्य की बात तो यह है कि परामर्श के साथ दवाएं भी उपलब्ध कराते हैं। कई बार मरीजों की तबीयत भी बिगड़ जाती है। स्वास्थ्य विभाग फिर कार्रवाई का झुनझुना हिला देता है।
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