नगर कुंवरगांव का गायत्री शक्तिपीठ जिले के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है, जिसे स्थानीय लोग और बाहर के श्रद्धालु आध्यात्मिक आस्था का केंद्र मानते हैं। मंदिर में माता की पांच मूर्तियों के साथ-साथ शिवलिंग भी स्थापित है, जिससे यह स्थल और भी पावन और आकर्षक बन गया है। श्रद्धालु यहां आकर माथा टेकते हैं और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना करते हैं।
इतिहास में यह स्थल खास महत्व रखता है। नगर के तिरपोलिया क्षेत्र में स्थित इस मंदिर का शिलान्यास जयदेव माहेश्वरी के विशेष आग्रह पर स्वयं पंडित श्री राम शर्मा ने 30 अप्रैल 1981 को किया था। वर्तमान में मंदिर की व्यवस्थाओं का संचालन सात सदस्यों के ट्रस्ट द्वारा किया जाता है।
विशेष रूप से नवरात्रि के अवसर पर मंदिर में तैयारियाँ पूरी हो चुकी हैं। इस दौरान प्रतिदिन सुबह से शाम तक अखंड गायत्री मंत्र जाप चलता रहता है। नवमी के दिन विशेष यज्ञ का आयोजन भी किया जाएगा। गायत्री शक्तिपीठ में सुबह और शाम की आरती नियमित रूप से होती है, और हर रविवार को यज्ञ का आयोजन होता है, जिससे भक्तों को आध्यात्मिक शांति और सुकून की अनुभूति होती है।
मंदिर के भक्त शेष माहेश्वरी ने बताया, “शक्ति पीठ में जाकर सुकून मिलता है। मां के चरणों में कुछ देर बैठकर सारी चिंता दूर हो जाती है। मेरा नया जीवन मां की कृपा का ही परिणाम है। रोज़ाना एक बार मां के दर्शन करना मेरे लिए अनिवार्य हो गया है।”

इस समय मंदिर में चल रहे अखंड मंत्र जाप और आगामी नवमी यज्ञ के कारण श्रद्धालुओं का आना-जाना लगातार बना हुआ है। श्रद्धालु यहां अपनी भक्ति व्यक्त करने के साथ-साथ आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव भी प्राप्त कर रहे हैं।
परिवराजक सपना शर्मा
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