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बदांयू – सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं खुद बीमार.. कैसे मिले बेहतर उपचार

बदांयू 14 सितंबर।

जिले में स्वास्थ्य सेवाएं खुद बीमार पड़ी हैं। ऐसे में सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों को बेहतर उपचार मिलने की उम्मीद भी कैसे की जा सकती है। जिला अस्पताल से लेकर सभी सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चिकित्सकों और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी से जूझ रहे हैं। यहां मरीजों का उपचार जुगाड़ से किया जा रहा है।

स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े देखें तो पता चलता है कि जिला अस्पताल में चिकित्सकों के 25 पदों के सापेक्ष महज 15 की ही तैनाती है। इस कारण यहां आने वाले मरीजों के लिए उपचार और परामर्श ले पाना किसी चुनौती से कम नहीं होता।

जिले की सीएचसी की दशा ओर भी चिंताजनक है, विशेषज्ञ चिकित्सक न होने के कारण अक्सर मरीजों को बैरंग लौटना पड़ता है। सीएचसी में सर्जन, बेहोशी के चिकित्सक, त्वचा रोग स्पेशलिस्ट, चेस्ट फिजिशियन और पैथोलॉजिस्ट न होने से मरीजों को निजी अस्पताल में इन बीमारियों का इलाज कराना पड़ता है।

ग्रामीण क्षेत्र की बात करें तो यहां मरीज इलाज के लिए पूरी तरह निजी चिकित्सकों पर ही निर्भर हैं। सरकारी अस्पतालों के भरोसे रहेंगे तो इनकी बीमारी और बिगड़ जाएगी। जिले में 240 चिकित्सकों के साक्षेप 76 डॉक्टर ही तैनात हैं, यही हाल पैरामेडिकल स्टाफ का भी है। इनके सहारे जिले के 16 सीएचसी का संचालन हो रहा है, जबकि जिले के प्रत्येक सीएचसी पर प्रतिदिन औसतन 300 से 400 मरीज आते हैं।
जिले के सभी सीएचसी पर अल्ट्रासाउंड की सुविधा नहीं है। इस कारण यहां महिला मरीजों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

गर्भवती महिलाओं को या तो निजी केंद्रों पर अल्ट्रासाउंड कराना पड़ता है या फिर जिला मुख्यालय की दौड़ लगानी पड़ती है। सीएचसी पर थायराइड और हार्माेंस सहित कई अन्य जांचों की भी सुविधा नहीं है। इन जांचों के लिए मरीजों को निजी लैब पर जाना पड़ता है और जांच के लिए मोटा खर्चा करना पड़ता है।

जिले में चिकित्सकों और पैरोमेडिकल स्टाफ की कमी चल रही है। इस संबंध में शासन से लगातार पत्राचार किया जा रहा है। शासन से ही इनकी तैनाती संभव है।
-डॉ रामेश्वर मिश्रा, सीएमओ बदायूं।

प्रदीप प्रजापति

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