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बदायूं जिले में सट्टे की बुरी लत ने कई परिवारों को कंगाल कर दिया। कर्ज के बोझ में ये लोग ऐसे डूबे कि अपना घर तक छोड़ना पड़ गया।
जिले में सट्टे से घर टूटकर बर्बाद हो रहे हैं। कुछ सट्टेबाजों के चुंगल में फंसकर अपनी जमापूंजी को खोकर जान दे रहे हैं तो कुछ शहर छोड़ने को मजबूर हो रहे हैं। पिछले कुछ वर्ष में शहर से बड़े से लेकर छोटे व्यापारी शहर को छोड़कर जा चुके हैं। वहीं सट्टेबाजों के खिलाफ 13जी एक्ट एक तरह से सुरक्षा कवच का काम कर रही है। सटोरियों का खुला उदेश्य बन गया है कि 13जी में चालान कराओ और जमकर सट्टा लगवाओ।
इतना ही नहीं कई धनाढ्य परिवार सब कुछ खोकर शहर छोड़ चुके हैं। इन सबके पीछे कारण सट्टा कारोबार रहा।
ऐसे नगर ही नहीं जिले के अन्य कस्बों में अनगिनत केस है जो सट्टेबाजी के चलते अपना घर छोड़कर बड़े शहरों में नोकरी, सब्जी या फल की रेहड़ी लगाकर परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं। अगर इन सटोरियों के खिलाफ कोई सख्त कानून अमल में लाया जाऐ तो इस सामाजिक बुराई पर कुछ हद तक रोक लगाई जा सकती है।
13 जी से नहीं डरते लोग, थाने से मिल जाती आसानी से जमानत
दरअसल इसके पीछे 13जी एक्ट का भी अहम हाथ है। जमानतीय अपराध होने के कारण आसानी से इसमें जमानत मिल जाती है। जबकि नियम यह है कि अगर पुलिस घर में या किसी अड्डे पर सट्टा होते हुए पकड़े तब धारा 3/4 लगानी चाहिए। लेकिन पुलिस 13जी में ही उनका चालान कर थाने से जमानत दे देती है। या ज्यादातर मजिस्ट्रेट के यहां से उसी दिन जमानत पा जाते हैं।
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