2:33 pm Friday , 14 August 2026
BREAKING NEWS

कांवड़ यात्रा -एक लेन आस्था, एक लेन रफ्तार की: कासगंज का फॉर्मूला बदायूं में क्यों नहीं ?

उझानी-बदायूं, 14 अगस्त।

कांवड़ यात्रा के दौरान हाईवे बंद करने के बजाय ट्रैफिक सुचारू रखने का फॉर्मूला कासगंज और हाथरस प्रशासन ने दिखा दिया है। यहां न रूट डायवर्ट किया गया, न हाईवे पूरी तरह बंद। बस एक लेन कांवड़ियों के हवाले और दूसरी लेन वाहनों के लिए। नतीजा: “बम-बम भोले” की गूंज भी और वाहनों की रफ्तार भी।

सोरों से निकलते ही जगह-जगह पुलिस के बैरियर और संकेतक बोर्ड लगे हैं। बोर्ड साफ बताते हैं – हाईवे की एक लेन सिर्फ कांवड़ियों के लिए सुरक्षित है। सोरों से लेकर सिकन्द्राराऊ तक यही व्यवस्था लागू है। एक तरफ कांवड़िए कंधे पर कांवड़ और गंगाजल लेकर बढ़ रहे हैं, तो दूसरी तरफ दूसरी लेन पर वाहन सरपट दौड़ रहे हैं।

कासगंज और हाथरस प्रशासन ने पूरे कांवड़ मार्ग पर खास इंतजाम किए हैं। हाईवे पर लाइट, रस्सी और मजबूत बैरिकेडिंग की गई है ताकि कोई भी वाहन गलती से भी कांवड़ियों की लेन में न घुसे। पुलिस कर्मी जगह-जगह तैनात हैं और लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं। इस वजह से श्रद्धालुओं को सुरक्षा मिली और आम जनता को जाम से राहत।

वहीं पड़ोसी बदायूं जिला प्रशासन ने शुक्रवार से सोमवार तक हाईवे को भारी वाहनों के लिए पूरी तरह प्रतिबंधित कर रखा है। इस कारण बसों और ट्रकों को लंबा चक्कर काटकर जाना पड़ रहा है। इसका सीधा असर यात्रियों की जेब और समय दोनों पर पड़ रहा है। बस से सफर करने वालों को अतिरिक्त किराया देना पड़ रहा है और गंतव्य तक पहुंचने में घंटों ज्यादा लग रहे हैं।

स्थानीय लोगों और परिवहन से जुड़े लोगों का कहना है कि बदायूं में भी फोरलेन चौड़ा हाईवे है। अगर कासगंज-हाथरस की तर्ज पर एक लेन वाहन और एक लेन कांवड़ियों के लिए निर्धारित कर दी जाए, तो समस्या काफी हद तक हल हो सकती है। न श्रद्धालुओं की आस्था में बाधा आएगी और न ही आम आदमी को दिक्कत होगी।

प्रशासनिक सूत्रों का भी मानना है कि बैरिकेडिंग और पुलिस बल की मदद से इस मॉडल को बदायूं में भी आसानी से लागू किया जा सकता है। जरूरत सिर्फ इच्छाशक्ति की है।

फिलहाल कांवड़ मार्ग पर कासगंज का यह प्रयोग मिसाल बन रहा है – जहां आस्था भी बची और आवागमन भी।

राजेश वार्ष्णेय, एमके

विज्ञापन एक्सप्रेस