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36 से ज्यादा डिप्लोमा कोर्स होंगे बंद
लखनऊ 14 जुलाई ।
उत्तर प्रदेश में पैरामेडिकल छात्रों के लिए अच्छी खबर। अब एक्सरे, सीटी स्कैन, एमआरआई जैसी अलग-अलग मशीनों के लिए अलग-अलग डिप्लोमा करने की जरूरत नहीं होगी। राज्य सरकार एक ही संयुक्त डिग्री से कई मशीनें चलाने की सुविधा देने जा रही है।
एक्सरे, एमआरआई, सीटी स्कैन के लिए एक नया संयुक्त कोर्स बनेगा। इसी तरह हृदय, पेट और किडनी से जुड़ी जांच मशीनों के लिए भी अलग-अलग एकीकृत कोर्स तैयार किए जा रहे हैं।
अभी प्रदेश में जांच की हर मशीन के लिए अलग डिप्लोमा चलता है। इसमें डिप्लोमा इन ऑडियो एंड स्पीचथेरेपी, ब्लड ट्रांसफ्यूजन, प्लास्टिक सर्जरी, डायलिस टेक्नीशियन, ऑप्टोमेट्री, सैनिटेशन, रेस्पिरेटरी टेक्नीशियन सहित करीब 36 डिप्लोमा और 12 सर्टिफिकेट कोर्स शामिल हैं। इनकी करीब 24 हजार सीटें हैं। नेशनल एलाइड एंड हेल्थकेयर काउंसिल से मंजूरी न मिलने के कारण इन्हें बंद किया जा रहा है।
इस साल स्टेट एलाइड एंड हेल्थकेयर काउंसिल ने सिर्फ 5 कोर्स को ही मंजूरी दी है – डिप्लोमा ऑफ एनेस्थिसियोलॉजी एंड ओटी टेक्नोलॉजी, डिप्लोमा इन रेडियोथेरेपी टेक्नोलॉजी, डिप्लोमा इन डायलिस टेक्नोलॉजी, डिप्लोमा इन हेल्थ इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट और डिप्लोमा इन मेडिकल लैबोरेटरी टेक्नोलॉजी। इनमें प्रवेश प्रक्रिया शुरू हो गई है।
चिकित्सा शिक्षा विभाग के मुताबिक, कई कोर्स ऐसे थे जिनके बाद नौकरी की संभावना लगभग नहीं थी। इसलिए अब पाठ्यक्रमों को “जॉब आधारित” बनाया जा रहा है। पैरामेडिकल विशेषज्ञों की टीम अन्य राज्यों के कोर्स का अध्ययन कर नया पाठ्यक्रम बना रही है। जिसे नेशनल काउंसिल मंजूरी देगी, वही यूपी में लागू होगा।
अपर मुख्य सचिव चिकित्सा शिक्षा अमित कुमार घोष ने कहा कि प्राथमिकता छात्रों को डिग्री के बाद तुरंत नौकरी दिलाना है। नए संयुक्त कोर्स से सरकारी नौकरी में शैक्षिक योग्यता और समकक्षता को लेकर होने वाला विवाद भी खत्म होगा। उम्मीद है अगले साल तक सभी नए संयुक्त पाठ्यक्रम लागू हो जाएंगे।
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