यह कहां जा रहे हैं हम, जिसमें दम उसके साथ हम ?
बदायूं की बात – सुशील धींगडा के साथ
पत्रकारिता दिवस आने को है और सारे संगठन मिलकर समारोह आयोजित करने की योजना बना रहे हैं परंतु इस ओर किसी का ध्यान मुश्किल से जाएगा कि हम कहां जा रहे हैं और पत्रकारिता में जिसमें दम उसके साथ हम की राह पर चलने वालों से मुकाबला कब और कैसे किया जाएगा जबकि जनपद की पत्रकारिता में आज इस विचार पर मंथन करने की जरूरत है। मजेदार बात यह है कि जिले में पत्रकारिता के गिरते हुए स्तर और कुछ लोगों की धनबटोरी नीति वाली और पत्रकारिता आज चाटुकारिता के सबसे नीचे स्तर पर पहुंच गई इसको सब मानते है, जानते हैं और महसूस भी करते हैं लेकिन बिल्ली के गले में कौन सा चूहा घंटी बांधेगा इसको सोचकर खामोश हो जाना और हालात को और खराब होने का इंतजार कर रहे हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि पत्रकारिता के के नाम पर चाटुकारिता करने वालों का अंतिम विंदु आने वाला है।




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