1:20 am Thursday , 13 August 2026
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विधानसभा चुनाव में कौन टिकट पाएगा और किसका पत्ता कट जाएगा ?

बदायूं की बात – सुशील धींगडा के साथ
जिले के राजनेतिक गलियारों में आगामी विधानसभा चुनावों को एक चर्चा जोरों पर चल रही है जिसमें अपने – अपने क्षेत्र के वर्तमान विधायक का टिकट कटने और उम्मीदवार बदलने के कारण बताये जा रहे हैं लेकिन वर्तमान की जगह स्थानापन्न में किसको लाया जाएगा। विदित रहे कि वर्तमान में जिले की छह सीटों में तीन भाजपा और तीन सपा के कब्जे में हैं। शहर में भाजपा के महेश गुप्ता विधायक हैं इनके टिकट कटने की चर्चाएं हो रहीं हैं लेकिन जा नाम लिए जा रहे हैं वह उन लोगों के गले भी नहीं उतर रहे जो नाम ले रहे हैं। सपा से शहर में आबिद रजा का नाम लिया जा रहा है जो बदायूं से ज्यादा शेखूपुर के दीवाने लग रहे हैं तो क्या शेखूपुर में मौजूद सपा विधायक हिमांशु यादव का टिकट कट जाएगा क्या जिले में सपा के संस्थापक स्व बनवारी सिंह यादव की राजनीति को खत्म करने का साहस सपा कर पाएगी, क्या जिलाध्यक्ष आशीष यादव अपने पुत्र का टिकट बचाने में असफल हो जाएगे, इसका जवाब चर्चा करने वालों के पास भी नहीं है। शेखूपुर में यही स्थति भाजपा के पूर्व विधायक धर्मेन्द्र शाक्य की जगह उम्मीदवार परिवर्तन की बात करने वालों के बीच चर्चा की कहानी बनी हुई है क्योंकि धर्मेन्द्र शाक्य के पिता पूर्व मंत्री भगवान सिंह शाक्य के राजनेतिक प्रभाव को सब मानते है। भाजपा शासन में जिले में सबसे अधिक विकास कार्य कराने वाले दातागंज में विधायक राजीव कुमार सिंह बब्बू के टिकट को खतरा बताने वालों के पास इस बात का जवाब नहीं हैं कि एक प्रभावशाली केंद्रीय मंत्री और प्रदेश के मुख्यमंत्री का संरक्षण से बहुचर्चित विधायक बब्बू का टिकट किस बात को लेकर कटेगा। हां यह बात थोडी लगती है कि भाजपा के एक पूर्व संासद और बब्बू के बीच छत्तीस का आंकडा चल रहा है पर यह भी सभी मानते हैं कि भाजपा में अकड दिखाने वालों से ऐसी पकड दिखाने वालों की संख्या कहीं ज्यादा है जो 36 को 63 बनाने में महारथ रखते हैं। दातागंज में सपा अपने अंदरूनी कलेश को नहीं मिटा पा रही जो भाजपा की मजबूती का कारण बना हुआ है। दातागंज में यह स्थति सामने आ सकती है कि पूर्व सांसद फिर सपा में वापसी करके अपनी पुत्री को उम्मीदवार बनवा ले पर चौधरी नरेश प्रताप सिंह यादव और प्रेम पाल सिंह यादव इस बात को राजी होगें इस पर सभी को संदेह है। सहसवान में सपा विधायक ब्रजेश यादव के टिकट को कोई खतरा नहीं है जबकि भाजपा से फिर कोई नया उम्मीदवार मैदान में आएगा इस बात सपा और भाजपा दोनों के समर्थकों को लगती है। बिल्सी में भाजपा विधायक हरीश शाक्य के टिकट को खतरा बताने वालों के पास एक बात है जो जिले के सबसे शक्तिशाली राजनेतिक के पुत्र को टिकट मिलने की संभावना व्यक्त करते हुए हरीश शाक्य का क्षत्र परिवर्तन किए जाने की संभावना व्यक्त कर रहें हैं परंतु इस बात पर वह भी चुप्पी साधे हुए हैं कि हरीश शाक्य की सक्रियता, वाकपटुता और राजनेतिक पकड को कमजोर समझने वालों को अपनी भूल का अहसास हो सकता है। अब बात करते हैं बिसौली की वहां की राजनीति में उथल – पुथल मची हुई है क्योंकि पिछले विधान सभा चुनाव में सपा से जीतने वाले आशुतोष मौर्य वर्तमान में भाजपाई खेमे में ज्यादा सक्रिय नजर आ रहे हैं जिसके चलते उनके भाजपा से मैदान में आने की संभावनाएं ज्यादा हैं पर इस हालात में भाजपा से पराजित होने वाले पूर्व विधायक कुशाग्र सागर चुप बैठे जाएगें या फिर दलगत प्रभाव के चलते अपनी राजनीति को किसी नए रास्ते पर ले जाएगें इसका जवाब तो उसी समय मिलेगा जब चुनावी शतरंज में शह मात की चाल चलीं जा रहीं होगी।

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