4:07 am Friday , 14 August 2026
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नहीं चाहते याद करना नानी – तो- जागों सोने वालों सुन लो मेरी कहानी !

बदायूं की बात – सुशील धींगडा के साथ
आज हमारे पालनहार शायद इसलिए सो रहे हैं कि चुनाव में अभी बहुत दिन बाकी है। शायद उनको लगता है कि मतदाता तब तक सब कुछ भूल जाएगें जबकि चुनाव से कुछ समय पूर्व कराये जाने वाले काम चुनाव वैतरणी को पार लगाने में सहायक होगे। हो सकता है हमारे पालनहारों की इस बात में दम हो लेकिन उनको यह नहीं भूलना चाहिए कि बदायूं वाले बहुत चुप रहते हैं और अपने वोट की ताकत जानते हैं और जब समय आता है घंटों लाइन में लग कर बदलाव की राह बनाकर चैन की सांस लेते हैं। पालनहार समझ रहे हैं कि उनके बीच चलने वाली गुटबाजी से आम मतदाता को कोई सरोकार नहीं हैं और ना मतदाता को गुटबाजी का पता है तो यह हमारे पालनहारों की बहुत बडी भूल है, जनपद में नगर पालिका विधान सभा लोकसभा के चुनाव इसका उदाहरण है। आज दातागंज में पूर्व संासद की हुंकार को नजरंदाज करने, बदायूं छोडकर गैर जिले का सासंद बने बदायूं के पूर्व सांसद का राजनेतिक पैतरा, बिसौली में कमल के फूल को लेकर बन रही कीचड, बदायूं, शेखूपुर, बिल्सी और सहसवान में मिटटी में मिलाकर रखने के सपने देखने वाले सपा और भाजपा के अपने कहीं रंग में भंग डालने में सफल हो गए तो अंजाम आने से पहले ऐसा पत्ता कटेगा कि दिन में तारे देखने को मजबूर हो जाएगे जबकि चुनाव से पूर्व रेल चलवा कर चुनाव जीतने का सपना भी धरा रह जाएगा। अगर ऐसा हुआ तो पालनहारों को नानी की याद दिला सकती है।

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