सनातन धर्म में परंपरा अनुसार खरमास लगने के साथ ही विवाह, सगाई, मुंडन, गृह प्रवेश जैसे शुभ और मांगलिक कार्य बंद कर दिए जाते हैं। ज्योतिषाचार्य राजेश कुमार शर्मा के अनुसार, इस बार खरमास 15 दिसम्बर से लग रहा है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, खरमास तब लगता है जब भगवान सूर्य का धनु या मीन राशि में प्रवेश होता है। इस तरह से खरमास साल भर में दो बार लगता है, जिसका समय एक महीने तक होता है।
इस बार 15 दिसंबर को भगवान सूर्य का रात्रि 10:19 पर धनु राशि में प्रवेश होने जा रहा है। इसके बाद भगवान सूर्य अगले एक महीने इसी राशि में गोचर करने वाले हैं, फिर 14 जनवरी यानि मकर संक्रांति पर भगवान सूर्य का मकर राशि में प्रवेश होगा, भगवान सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ ही खरमास खत्म हो जाएगा। इसी के साथ शुक्र देव भी 11 अगस्त को अस्त हो रहे हैं जिस कारण से सभी मांगलिक कार्य निषेध हो जाते हैं।
खरमास के समय भगवान सूर्य धनु या मीन राशि में गोचर कर रहे होते हैं और इन दोनों राशियों के स्वामी देवगुरु बृहस्पति हैं।
खरमास में इसलिए नहीं होते मांगलिक कार्य—
भगवान सूर्य जब देवगुरु बृहस्पति के घर में आते हैं तो वो अपना तेज कम कर देते हैं, साथ ही इस दौरान बृहस्पति ग्रह की शुभता कम हो जाती है, भगवान सूर्य के तेज कम होने और देवगुरु बृहस्पति की शुभता का प्रभाव कम होने के वजह से ही खरमास में विवाह, सगाई, मुंडन, गृह प्रवेश जैसे शुभ-मांगलिक कार्य नहीं कराए जाते हैं।
दान पुण्य के लिए खरमास का महीना होता है शुभ
एक ओर खरमास मांगलिक कार्यों के लिए शुभ नहीं होता तो वहीं दूसरी ओर खरमास में भगवान सूर्य और विष्णु की पूजा करना बहुत शुभ और फल देने वाला होता है, साथ ही अगर दान पुण्य भी करना है तो उसके लिए भी खरमास का समय शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार इस इस समय में सूर्य देव को जल अर्पित करना, सूर्य चालीसा का पाठ, आदित्य हृदय स्तोत्र, सूर्य सूक्त का पाठ कल्याणकारी सिद्ध होता है।
सनातन धर्म में खरमास का महीना बहुत ही अहम माना गया है।
bdnindia.com bdnindia.com | www.bdnindia.com
